Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, poem, vyang

व्यंग कविता –बातों में शेर हूं पर काम में ढेर हूं

 व्यंग कविता –बातों में शेर हूं पर काम में ढेर हूं सीज़न में जनता से बड़ी-बड़ी बातें करता हूं  गंभीर …


 व्यंग कविता –बातों में शेर हूं पर काम में ढेर हूं

व्यंग कविता –बातों में शेर हूं पर काम में ढेर हूं
सीज़न में जनता से बड़ी-बड़ी बातें करता हूं 
गंभीर कठिन वादे ठस्के से करता हूं 
समय आने पर परिस्थितियों पर दोष मढ़ता हूं 
बातूनी शेर हूं पर काम में ढेर हूं 
दूसरों की सफ़लता देख अपमानित महसूस होता हूं 
अपना दोष दूसरों पर मढ़ देता हूं 
भ्रष्टाचार का विरोध कर मैं खुद वह करता हूं 
बातूनी शेर हूं पर काम में ढेर हूं 
अधीनस्थों को भ्रष्टाचार के लिए उकसाता हूं 
बात बिगड़ने पर दोष उनके सर मढ़ता हूं 
अपने पेशे में बहुत बड़ा होशियार हूं 
बातूनी शेर पर काम में ढेर हूं 
ख़ुद को होशियारी से पाकसाफ़ बताता हूं 
अपना इल्ज़ाम दूसरों पर मढ़ देता हूं 
मेरे खिलाफ़ साजिश है ठस्के के से बोल देता हूं 
बातूनी शेर हूं पर काम में ढेर हूं 
बयान को निजी राय कोर्ट की बात सुना हूं 
पार्टी भी हाथ खड़ा कर देगी जानता हूं 
प्रोफेशन बड़ी-बड़ी बातें करने का है परेशान हूं 
बातूनी शेर हूं पर काम में ढेर हूं  

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

Muktidham by Dr. H.K. Mishra

September 30, 2021

 मुक्तिधाम प्रीत की रीत निभाने को दो गीत मिले गाते गाते, एक प्यार तुम्हारे पाने का, दूजे दर्द भरे एहसासों

Maa mujhe na mar by mainudeen kohri

September 30, 2021

 माँ मुझे ना मार माँ, मैं भी कुल का मान बढाऊँगी । माँ ,मैं भी रिश्तों के बाग सजाऊंगी।। माँ,मुझे

Betiyan by Anita Sharma

September 29, 2021

 बेटियाँ बिटिया से घर संसार है, रौनक घर परिवार है। सबके बीच की अहम् कड़ी। प्यार और विश्वास की मूरत

Meri beti by Jay shree birmi

September 29, 2021

 मेरी बेटी जब देखें कोमल हाथों को बाजू के पास मेरे एहसासों से भर गया था मन और ह्रदय  दोनों

Shanti aur prem ki chah by Jitendra Kabir

September 29, 2021

 शांति और प्रेम की चाह कोई कितना भी क्रूर हुआ, हत्यारा हुआ, झूठा,पाखंडी और चोर हुआ, पर समाज के सामने

Vichardhara by nandini laheja

September 29, 2021

विचारधारा अनगिनत विचारों की धारा में, नित बहता जाता यह जीवन है। पल भी यह ना चैन पाता,विचारों में मग्न

Leave a Comment