व्यंग कविता –बातों में शेर हूं पर काम में ढेर हूं
व्यंग कविता –बातों में शेर हूं पर काम में ढेर हूं सीज़न में जनता से बड़ी-बड़ी बातें करता हूं गंभीर …
Related Posts
Bharosa khud ka by Dr. indu kumari
October 7, 2021
भरोसा खुद का तुझमें बहुत सी ताकत है जीवन से लड़ना सीखो आती है ढेर समस्या पर निपटना भी विवेक
Khudgarji by Anita Sharma
October 7, 2021
विषय-खुदगर्जी खुदगर्ज कौन नहीं इस संसार में। अपनो का साथ पाने की तमन्ना हर इन्सान में। अपनापन अपना परिवार सर्वोपरि
Jivan ko jeena by Anita Sharma
October 7, 2021
“जीवन को जीना “ जीवन ने सिखलाया है, जीवन को जीना है कैसे? सुख के पीछे भागोगे तो, दुख चिंता
Fislan by Anita Sharma
October 5, 2021
“फिसलन” संसार के मोह जाल में उलझे फिसल रहा समय। कब किसको फुर्सत यहाँ पर बीत रही उम्र । शून्य
Dharohar by Sudhir Srivastava
October 1, 2021
धरोहर हम सबके लिए हमारे बुजुर्ग धरोहर की तरह हैं, जिस तरह हम सब रीति रिवाजों, त्योहारों, परम्पराओं को सम्मान
Sabke apne Gandhi by Jitendra Kabir
October 1, 2021
सबके अपने गांधी गांधी, तुम किसके हो? उनके हो, जो तुम्हारे नाम पर बड़ी-बड़ी योजनाएं चलाते हैं, दिखावे के लिए।

