Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, sudhir_srivastava

व्यंग्य धरती को मरने दो

 व्यंग्यधरती को मरने दो सुधीर श्रीवास्तव धरती उपज को रही तो खोने दो धरती मर रही है मरने दो। बहुत …


 व्यंग्य
धरती को मरने दो

सुधीर श्रीवास्तव
सुधीर श्रीवास्तव

धरती उपज को रही तो खोने दो

धरती मर रही है मरने दो।

बहुत हलकान होने की जरूरत नहीं है

धरती बंजर हो रही है तो हो जाने दो।

क्या आपको पता नहीं है?

हम संवेदनहीन हो गए हैं

इंसान कहां रह गए हम

पत्थर हो गए हैं हम।

जब अपनी मां को हम कुछ नहीं समझते

बड़े गर्व से उसकी ममता पर

कुठाराघात करने भी नहीं चूकते,

इतना तक ही नहीं है

हम तो इससे भी आगे निकल आते हैं

अपने स्वार्थ में हम उन्हें

मरने के लिए अकेला छोड़ आते हैं,

या फिर वृद्धाश्रम के हवाले कर आते हैं।

फिर भी आप सोचते हो

हम धरती की चिंता करेंगे

भूखों मर जायेंगे पर

धरती मां की कोख में

अंग्रेजियत का विष घोलते रहेंगे।

उसका आंचल छलनी करते ही रहेंगे

उसकी गोद को खोखला कर

उसके अस्तित्व से खेलते ही रहेंगे

धरती उपज खोये या अस्तित्व 

हम तो मनमानी, बेशर्मी का नाच यूं ही करते रहेंगे।

धरती रहे या न रहे हमें चिंता नहीं

आपको बड़ी चिंता है धरती की यदि

तो आपकी भी राह में थोड़ा बनेंगे हम

धरती को मार कर ही चैन लेंगे हम। 

सुधीर श्रीवास्तव

गोण्डा उत्तर प्रदेश

८११५२८५९२१

© मौलिक, स्वरचित

२६.०४.२०२२


Related Posts

जिंदगी तो है बहता झरना/zindagi to hai bahta jharna

August 2, 2022

जिंदगी तो है बहता झरना कितनी सारी जिंदगियाँ मिलती है रोजानाहर जिंदगी जैसे है किताब का एक पन्नापर कहाँ मुनासिब

पापा हमारे लिए हैं भगवान

July 31, 2022

 पापा हमारे लिए हैं भगवान |papa hamare liye bhagwan hai हमारे पापा हमारे लिए हैं भगवान उनकी पनाह में रहना

अगर आप ईश्वर से थोड़ा डरते होते

July 22, 2022

 अगर आप ईश्वर से थोड़ा डरते होते  न करनी पड़े फरियाद हमें  अगर आप ऐसे होते  न करनी पड़े नफ़रत

किसी की सफलता को ना दो निर्भरता का नाम!

July 22, 2022

 किसी की सफलता को ना दो निर्भरता का नाम! सफलता किसी के दम पर जीती नहीं जाती, पर कुछ लोगों

सहमा-सहमा आज| sahma sahma aaji

July 20, 2022

 सहमा-सहमा आज कौन पूछता योग्यता, तिकड़म है आधार । कौवे मोती चुन रहे, हंस हुये बेकार ।। परिवर्तन के दौर

मनमीत रे करनी हैं तुझ संग प्रीत रे | manmeet re karni hai tujh sang Preet re

July 15, 2022

 मनमीत रे करनी हैं तुझ संग प्रीत रे  मनमीत रे करनी हैं तुझ संग प्रीत रे  जाने है हम तू

PreviousNext

Leave a Comment