Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, poem, vyang

व्यंग्य कविता -मासिक शासकीय पगार चौदह हज़ार है

 यह व्यंग्यात्मक कविता भ्रष्टाचार की हदें पार है?क्योंकि मेरा वेतन केवल चौदह हज़ार है।पर एक महीनें में मेरा खर्चा लाखों …


 यह व्यंग्यात्मक कविता भ्रष्टाचार की हदें पार है?क्योंकि मेरा वेतन केवल चौदह हज़ार है।पर एक महीनें में मेरा खर्चा लाखों है, प्रॉपर्टी बैंक बैलेंस सब है। ये सबकी नजरों में है फिर भी सुरक्षित हूं इस पर व्यंग्यात्मक वार है।

 व्यंग्य कविता -मासिक शासकीय पगार चौदह हज़ार है

भ्रष्टाचार की कृपा से मुझे धन अपार है
इंडिगो कार फ़्लैट प्लाट अपरंपार है
घर में हरे गुलाबी के पहाड़ है
मासिक शासकीय पगार सिर्फ़ चौदह हज़ार है

मेरे पास दिमाग नहीं यह सेटिंग का आधार है
काम रेटफिक्सिंग के अनेकों प्रकार है
अंदर खाने प्राइवेट काम भी अपार है
मासिक शासकीय पगार सिर्फ़ चौदह हज़ार है

चौदह हज़ार पंद्रह दिन निजी खर्चे का जुगाड़ है
मदिरा तंबाकू खर्रा के शौक अपार है
ऊपरी कमाई की मलाई जोरदार मजेदार है
मासिक शासकीय पगार सिर्फ़ चौदह हज़ार है

गरीब आदमी हूं यह सबसे बड़ा हथियार है
अंदर खाने सेठों को मात देने धन कुबेर तैयार है
शासन को मालूम है कार्यवाही नहीं हमारी पार है
मासिक शासकीय वेतन सिर्फ़ चौदह हज़ार है

मौसेरे भाइयों की मालकी में मेरा व्यापार है
भ्रष्टाचार के करोड़ों लगे हैं मलाई अपरंपार है
शासन जनता एजेंसियां चुप हैं हमारी किस्मत है
मासिक शासकीय पगार सिर्फ़ चौदह हज़ार है

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

परिस्थितियां

June 24, 2022

 परिस्थितियां सुधीर श्रीवास्तव जीवन है तो परिस्थितियों से दो चार होना ही पड़ता है, अनुकूल हो या प्रतिकूल हमें सहना

मजदूरों का मान

June 24, 2022

 मजदूरों का मान सुधीर श्रीवास्तव माना कि हम मजदूर हैं पर मेहनत से जी नहीं चुराते, अपने काम में समर्पित

पैसे का खेल

June 24, 2022

 पैसे का खेल सुधीर श्रीवास्तव समय के साथ पैसा भी अब अपना रंग दिखाने लगा है, पैसे पर भी आधुनिकता

शादियाँ

June 24, 2022

 शादियाँ सुधीर श्रीवास्तव शादियां वास्तव में एक अनुबंध है दो परिवारों, दो दिलों का, जिसमें निभाई जाती हैं परंपराएं, धारणाएं,

व्यंग्य माँ के गर्भ से बेटी का पत्र

June 24, 2022

 व्यंग्यमाँ के गर्भ से बेटी का पत्र सुधीर श्रीवास्तव          जब से मैं माँ के गर्भ में

माँ – तूम धन्य हो !

June 24, 2022

 माँ – तूम धन्य हो ! मईनुदीन कोहरी”नाचीज बीकानेरी” माँ … तेरा प्यार – दुलार माँ तेरी ममता माँ ,तूने

Leave a Comment