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Anita_sharma, poem

रात है तो सुबह भी तो आयेगी- अनिता शर्मा झाँसी

रात है तो सुबह भी तो आयेगी मन रे तू मत हो निराशकल एक नयी सुबह आयेगी।बीतेगी दुखो की घड़ियाँछायेगा …


रात है तो सुबह भी तो आयेगी

रात है तो सुबह भी तो आयेगी- अनिता शर्मा झाँसी
मन रे तू मत हो निराश
कल एक नयी सुबह आयेगी।
बीतेगी दुखो की घड़ियाँ
छायेगा खुशियों का गुबार ।
मन रे तू मत हो निराश
हर रात के बाद सुबह तो आयेगी।
भर देगी नव उत्साह अंदर
मिट जायेगी निराशा मन से ।
क्या सोचे?क्यों डरे ?
इक नयी सुबह फिर आयेगी।
तू जतन कर !तू आत्म विश्वास जगा।
भर दे कण कण में आत्म विश्वास
जाग्रत कर मन का हर कोना ।
तू जोश जगा,तू प्रेम भर रिश्तों में
फिर मुस्कान जगा होठों मे
तू सोच बदल एक सुबह फिर आयेगी।।

—–अनिता शर्मा झाँसी
—– मौलिक रचना


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