राजनीति भी अजीब है- सिद्धार्थ गोरखपुरी
राजनीति भी अजीब है कोई कह गया तो टिका रहा कोई कह के भी मुकर गया ये राजनीति भी बड़ी …
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अजय प्रसाद की रचनाएं
March 26, 2022
अजय प्रसाद की रचनाएं हमसे हमारे ख्वाब न छीन काँटों भरी गुलाब न छीन ।जिंदा तो हूँ गफलत में सहीयादों
मेरा मन है एक बंजारा- वीना आडवाणी तन्वी
March 26, 2022
मेरा मन है एक बंजारा मेरा मन है एक बंजारा स्थिर नहीं ये फिरता मारामाराकभी प्राकृतिक सौंदर्य में फिरेतो कभी
हौंसले-जयश्री बिरमी
March 25, 2022
हौंसले एक सुंदर नारीचल पड़ी गगन विहारीथा उसे उडना बहुतदूर दूर क्षितिज से भी दूरपंख थे छोटे और कोमलपार करेगी
जब वक्त थम सा गया-जयश्री बिरमी
March 25, 2022
जब वक्त थम सा गया एक बार ही मिली नजरें तो दिल उसी पर आ गयामिलने के लिए उसी से
दिल ढूँढता है-नंदिनी लहेजा
March 25, 2022
दिल ढूँढता है कहाँ गए बचपन के वो दिन,जो निश्चिंतता में गुजरते थे।ना लोभ था,ना कोई कपट,निश्छलता लिए रहते थे।दिल
कवि का ह्रदय है – नंदिनी लहेजा
March 25, 2022
शीर्षक-कवि का ह्रदय है कवि का ह्रदय है खजाना विचारों का , कविता हैं उसकी कुंजी।हँसाते, रुलाते,कभी दिल को छू