राजनीति भी अजीब है- सिद्धार्थ गोरखपुरी
राजनीति भी अजीब है कोई कह गया तो टिका रहा कोई कह के भी मुकर गया ये राजनीति भी बड़ी …
Related Posts
बस्ते के बोझ से दबा जा रहा बचपन
September 1, 2022
बस्ते के बोझ से दबा जा रहा बचपन नन्हीं सी पीठ पर बस्ते का बोझ हैदब रहा है बचपन लूट
गर मुश्किलों में रखकर तूँ कोई हल निकाले
September 1, 2022
गर मुश्किलों में रखकर तूँ कोई हल निकाले गर मुश्किलों में रखकर तूँ कोई हल निकालेजो टूट मैं गया तो
कविता – मोहन
September 1, 2022
कविता – मोहन मोहन! मुरली से प्रीत तुम्हारीअगाध अनन्त हुई कैसेप्रीत में पागल मीराबाईमन से सन्त हुई कैसे राधा ने
कविता – न मिला
September 1, 2022
कविता – न मिला एक उम्र खरच कर कुछ न मिलातुमको क्या पता सचमुच न मिलाक्या हुआ है कोई धरती
गीत -श्याम से
September 1, 2022
गीत -श्याम से श्याम के भक्तों ने कह डाला है अबतो श्याम सेराधा की है पैरवी बस श्याम से घनश्याम
कविता – बे-परवाह जमाना
September 1, 2022
कविता – बे-परवाह जमाना ये मन अक्सर बुनता रहता है ,ख्वाबों का ताना बाना ।दिल भी अक्सर छेड़े रहता है