राजनीति भी अजीब है- सिद्धार्थ गोरखपुरी
राजनीति भी अजीब है कोई कह गया तो टिका रहा कोई कह के भी मुकर गया ये राजनीति भी बड़ी …
Related Posts
जज़्बा जांबाज़ी भी पूंजी है हमारी
September 26, 2022
कविता(poem) जज़्बा जांबाज़ी भी पूंजी है हमारी वित्तीय हालत ख़राब है तो क्या हुआ
पापा मैं बोझ नहीं
September 24, 2022
विश्व बालिका दिवस पर विशेष 💓 पापा मैं बोझ नहीं 💓 मम्मी – पापा मैं बेटी हूँ आपकीपर , क्या
पिता के लिए कोई शब्द नहीं
September 22, 2022
कविता पिता के लिए कोई शब्द नहीं पिता की ज्ञानवर्धक बातों को अनुशासन से समझते नहींपिता के लिए कोई शब्द
कविता– उस दिन ” दशरथ केदारी ” भी मरा था !
September 22, 2022
कविता- उस दिन ” दशरथ केदारी ” भी मरा था ! उस दिन बहुत गहमागहमी थी जब एक हास्य कलाकार
सोच को संकुचित होने से बचाएं।
September 21, 2022
सोच को संकुचित होने से बचाएं। अपनी सोच को संकुचित ना होने दें,इस अपार समझ को कभी ना खोने दें,असीम
मेरी दर्द ए कहानी
September 19, 2022
मेरी दर्द ए कहानी ना हो कभी किसी की भी मेरी तरह जिंदगानीना हो कभी किसी कीमेरी तरह आंखों में