राजनीति भी अजीब है- सिद्धार्थ गोरखपुरी
राजनीति भी अजीब है कोई कह गया तो टिका रहा कोई कह के भी मुकर गया ये राजनीति भी बड़ी …
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गीत -समर्पण कर रहा हूँ- सिद्धार्थ गोरखपुरी
February 3, 2022
गीत -समर्पण कर रहा हूँ उसकी आँखों को अब खुद का दर्पण कर रहा हूँ फिर उसके सामने खुद का
मेरे यार फेसबुकिए-सिद्धार्थ गोरखपुरी
February 3, 2022
मेरे यार फेसबुकिए मेरे यार फेसबुकिए बता दो इस समय तुम हो कहाँमैंने तुम्हें ढूंढ रहा हूँयहाँ -वहाँ न जाने
रात है तो सुबह भी तो आयेगी- अनिता शर्मा झाँसी
January 25, 2022
रात है तो सुबह भी तो आयेगी मन रे तू मत हो निराशकल एक नयी सुबह आयेगी।बीतेगी दुखो की घड़ियाँछायेगा
मन के हारे हार- जितेन्द्र ‘कबीर’-
January 25, 2022
मन के हारे हार हार भले ही कर ले इंसान कोकुछ समय के लिए निराशलेकिन वो मुहैया करवाती है उसकोअपने
गलतियां दोहराने की सजा- जितेन्द्र ‘कबीर’
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गलतियां दोहराने की सजा देश में कोरोना की पहली लहरहमारी सरकारों ने विदेशों से खुद ब खुद हीबुलाई थी,जब इतनी
राजनीति के सियार- जितेन्द्र ‘कबीर’
January 25, 2022
राजनीति के सियार पैसा किसी के हथियार है,लालच किसी का हथियार है,इसी सनातन मोह कोसत्ता तक पहुंचने की सीढ़ी बनातेआजकल