Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

ये ख्वाब न होते तो क्या होता?

 कविता – ये ख्वाब न होते तो क्या होता? सिद्धार्थ गोरखपुरी झोपड़ी में रहने वाले लोग जब थोड़े व्यथित हो जाते …


 कविता – ये ख्वाब न होते तो क्या होता?

सिद्धार्थ गोरखपुरी
सिद्धार्थ गोरखपुरी

झोपड़ी में रहने वाले लोग

जब थोड़े व्यथित हो जाते है

वक़्त अपना भी बदलेगा

जब ये खुद को समझाते हैं

फिर रात की नींद में वे झट से

अपने ख्वाबों में जाते हैं

ख्वाब में मस्त मगन होकर

एक सपनों का घर बनाते है

वक़्त उनका अच्छा होता 

 तो उनका घर भी नया होता

ये ख्वाब न होते तो क्या होता?

हकीकत में टूटी साईकिल है

पर ख्वाबों में कार से चलते हैं

ये ख्वाब भी बड़े अजीब से हैं

जो दिन होते ही बदलते हैं

रात की चादर ओढ़ के अक्सर 

धरती से लिपट कर सोते हैं

उम्मीदों के धागों में अपने 

सभी ख्वाबों को पिरोते हैं

ग़र वक़्त उनकी हद में होता 

तो क्या ऐसा वाकया होता

ये ख्वाब न होते तो क्या होता?

दिन बेचैनी लिए हजारों

और रात ख्वाब में कटती

ज्यों थोड़ा सा आगे बढ़ते हैं 

त्यों किस्मत तेज डपटती

फिर किस्मत के दरवाजे से

वे ख्वाब से बाहर आते हैं 

टूटी नींद के हर एक पहलू

उनको दुःखी कर जाते हैं

ग़र वक्त सच में उनका होता

तो उनका भी नामों -निशा होता

ये ख्वाब न  होते तो क्या होता?

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

नववर्ष की चुनौतियां और तैयारियां- सुधीर श्रीवास्तव

January 6, 2022

नववर्ष की चुनौतियां और तैयारियां नववर्ष के साथ नयी नयीचुनौतियां भी कम नहीं है, ओमीक्रान पहले से ही डरा रही

नववर्ष का आगाज़- अनिता शर्मा

January 6, 2022

दिसम्बर की बिदाई और नववर्ष का आगाज़” लो दिसम्बर जाने को तैयार नववर्ष आने को उत्सुक हैं।सारे रंजो गम भुला

सफर ए इश्क़- R.S.meena Indian

January 6, 2022

कविता – सफर ए इश्क़ जिस दिन होगी अपने प्यार की शुरुआत । उस दिन तुमसे,हम अपनी वफ़ा जता देंगे

कैलेण्डर बदल जाएगा- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

कैलेण्डर बदल जाएगा बदलता आ रहा है जैसेसैंकड़ों सालों सेवैसे ही यह साल भी बदल जाएगा,कुछ यादें खट्टी – मीठीदर्ज

आम जनता का नसीब- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

आम जनता का नसीब आम जनता के लिएधर्मस्थलों पर ईश्वर के दर्शन हेतूप्रक्रिया अलग हैऔर ‘वी.आई.पी.’ के लिए अलग, जनता

सोचो जरा उनके बारे में भी- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सोचो जरा उनके बारे में भी तुम दुखी होकि इन सर्दियों में महंगीब्रांडेड रजाई नहीं खरीद पाए,जिन्हें मयस्सर नहींकड़कती सर्दी

Leave a Comment