Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, sudhir_srivastava

यही जीवन चक्र है

 यही जीवन चक्र है सुधीर श्रीवास्तव जीवन क्या है यह समझाने नहीं खुद समझने की जरूरत है, अदृश्य से जीवन …


 यही जीवन चक्र है

सुधीर श्रीवास्तव
सुधीर श्रीवास्तव

जीवन क्या है

यह समझाने नहीं

खुद समझने की जरूरत है,

अदृश्य से जीवन की शुरुआत

पल पल, छिन छिन विकास की गति

कितने रंग और दौर दिखाती है

नवजात, अबोध और बालपन से

चलते हुए बाल्यकाल, तरुणावस्था से होते हुए

युवा और फिर प्रौढ़ बनाती है

जिंदगी के रंग दिखाती है

धूप छांव का बोध कराती

धीरे धीरे खोखला होकर

जीर्ण, शीर्ण, क्षीण हो असहाय हो जाता 

और फिर जीवन समाप्त हो जाता 

जीवन चक्र अपना चक्र पूरा हो जाता

जब तक जीवन समझ में आता

जीवन का चक्र इतिहास हो जाता है। 

सुधीर श्रीवास्तव

गोण्डा उत्तर प्रदेश

८११५२८५९२१

© मौलिक, स्वरचित

२६.०४.२०२२


Related Posts

व्यंग्य स्वार्थ के घोड़े

June 24, 2022

 व्यंग्यस्वार्थ के घोड़े सुधीर श्रीवास्तव आजकल का यही जमाना अंधे को दर्पण दिखलाना, बेंच देते गंजे को कंघा देखो! कैसा

डरने लगा हूँ मैं

June 24, 2022

 डरने लगा हूँ मैं सुधीर श्रीवास्तव वो छोटा होकर  कितना बड़ा हो गया है, बड़ा होकर भी बहुत छोटा हो

परिस्थितियां

June 24, 2022

 परिस्थितियां सुधीर श्रीवास्तव जीवन है तो परिस्थितियों से दो चार होना ही पड़ता है, अनुकूल हो या प्रतिकूल हमें सहना

मजदूरों का मान

June 24, 2022

 मजदूरों का मान सुधीर श्रीवास्तव माना कि हम मजदूर हैं पर मेहनत से जी नहीं चुराते, अपने काम में समर्पित

कहानी रिश्ते

June 24, 2022

 कहानीरिश्ते   सुधीर श्रीवास्तव अभी मैं सोकर उठा भी नहीं था कि मोबाइल की लगातार बज रही  घंटी ने मुझे जगा

पक्षाघात के दो अविस्मरणीय वर्ष

June 24, 2022

 पक्षाघात के दो अविस्मरणीय वर्ष सुधीर श्रीवास्तव आपबीती पक्षाघात बना वरदान       ईश्वर और प्रकृति का हम सबके

PreviousNext

Leave a Comment