Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, vyang

मुझे बहुत ज़लनखोरी होती है

 भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव मुझे बहुत ज़लनखोरी होती है उसको बहुत सफ़लता मिलती है तो  उसपर मां लक्ष्मी की कृपा …


 भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव

मुझे बहुत ज़लनखोरी होती है

उसको बहुत सफ़लता मिलती है तो 
उसपर मां लक्ष्मी की कृपा होती है तो 
समाज में उसका मान सम्मान बढ़ता है तो 
मुझे बहुत  ज़लनखोरी होती है 
उसका आर्टिकल कविता बहुत पेपरों में छपते हैं तो 
व्हाट्सएप फेसबुक में उसकी तारीफ़ होती है तो 
उसकी पोस्ट को बहुत लाइक मिलती है तो 
मुझे बहुत ज़लनखोरी होती है 
मैं संस्थापक हूं मुझे कोई पूछता नहीं है तो 
पेपरों में मेरा नाम नहीं आता है तो 
मेरे स्वार्थी सेवाओं का मूल्यांकन नहीं होता है तो 
मुझे बहुत ज़लनखोरी होती है 
दोस्तों से उसकी पोस्ट बंद करवाने बोलता हूं तो 
एडमिन उसके समर्थन में आ जाता है तो 
उसकी वैल्यू और अधिक बढ़ गई है तो 
मुझे बहुत ज़लनखोरी होती है 
मेरा क्या होगा वह आगे बढ़ जाएगा तो 
मेरी चोमारी नहीं चलेंगी तो 
मेरा क्या होगा इसलिए तो 
मुझे बहुत ज़लनखोरी होती है 

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 

Related Posts

शासन से बेवफाई का अंजाम भुगत रहा हूं

March 4, 2023

 भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव शासन से बेवफाई का अंजाम भुगत रहा हूं पद और कुर्सी से बेवफाई किया हूं मैंने

मुझे बहुत ज़लनखोरी होती है

March 4, 2023

 भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव मुझे बहुत ज़लनखोरी होती है उसको बहुत सफ़लता मिलती है तो  उसपर मां लक्ष्मी की कृपा

क्योंकि ज़लनखोरों को मिर्ची लग रही है

March 4, 2023

 भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव  क्योंकि ज़लनखोरों को मिर्ची लग रही है मेरी कामयाबी से चारों और खुशी मच रही है 

हे परमपिता परमेश्वर

March 4, 2023

भावनानी के भाव हे परमपिता परमेश्वर आपके द्वारा दिए इस जीवन में इन मुस्कुराहटों का हम पर एहसान है हर

हे परवरदिगार मेरे मालिक

March 4, 2023

 भावनानी के भाव हे परवरदिगार मेरे मालिक मैंने कहा गुनहगार हूं मैं  उसने कहा बक्ष दूंगा  मैंने कहा परेशान हूं

आध्यात्मिकता जीवन का आधार है

February 16, 2023

जब हम जग मे आए जग हसां हम रोए।ऐसी करनी कर चलो हम जाए जग रोए ।। आध्यात्मिकता जीवन का

PreviousNext

Leave a Comment