Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, poem, vyang

मिलीभगत से जप्त माल को बदल देता हूं

यह व्यंग्यात्मक कविता एक राज्य में हुए जहरीली मदिरा कांड से मृत्यु में बात सामने आई थी कि जब्ती माल …


यह व्यंग्यात्मक कविता एक राज्य में हुए जहरीली मदिरा कांड से मृत्यु में बात सामने आई थी कि जब्ती माल को अंदर खाने निकाल दिया गयाथा,जैसा कि अनेकों विभागों में ऐसा होता है कि जप्त माल में हेराफेरी की जाती है इसपर आधारित है।

व्यंग्य कविता-मिलीभगत से जप्त माल को बदल देता हूं

पद दम पर हरेगुलाबी निकालने दिमाग लड़ाता हूं
जप्त मदिरा ड्रमों में पानी भरवा देता हूं
मानवीय जीवन की वैल्यू नहीं करता हूं
मिलीभगत से जप्त माल को बदल देता हूं

शासकीय पॉमऑयल जब्तीकर ऑफिस लाता हूं
सेटिंग कर चुपके से हरे गुलाबी लेता हूं
नहीं माना तो कार्रवाई कर केस बनाता हूं
मिलीभगत से जप्त माल को बदल देता हूं

अनेक अवैध मालों को जब जब्ती बनाता हूं
सेटिंग कर अंदर खाने बेच देता हूं
रिकॉर्ड में नॉमिनल जब्ती दिखाता हूं
मिलीभगत से जप्त माल को बदल देता हूं

प्लास्टिक बंदी से डिस्पोजल झिल्ली पकड़ता हूं
रिकॉर्ड में जब्ती बहुत कम दिखाता हूं
हरे गुलाबी लेकर बाकी छोड़ देता हूं
मिलीभगत से जप्त माल को बदल देता हूं

पूरी हेराफेरी ऐसे ही नहीं करता हूं
मिलीभगत का पक्का भरोसा पाता हूं
हिस्सेदारी बराबर ऊपर तक पहुंचाता हूं
मिलीभगत से जप्त माल को बदल देता हूं

-लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार कानूनी लेखक चिंतक कवि एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

Abou author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

अच्छी चाह तो अच्छी राह- डॉ. माध्वी बोरसे!

December 10, 2021

अच्छी चाह तो अच्छी राह! चलो सोचे और बोले एक समान, जिंदगी को बना ले, थोड़ा और आसान,दिल से और

जिंदगी का रिमोट कंट्रोल अपने हाथों से चलाना

December 10, 2021

अपनी जिंदगी का रिमोट कंट्रोल अपने हाथों से चलाना! उन्होंने मुझे हंसा दिया,उन्होंने मुझे रुला दिया,उन्होंने मुझे गुस्सा दिलाया,उन्होंने मुझे

हम सभी एक समान-डॉ. माध्वी बोरसे

December 10, 2021

हम सभी एक समान! जाति, धर्म से क्यों करते हैं भेदभाव,क्यों नहीं इंसानियत को आजमाओ? हम सभी का रक्त का

आंसू छलके- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 10, 2021

आंसू छलके आंसू भरकर स्वागत करना, बहुत पुरानी परंपरा अपनी,इंतजार लंबी जब होती है ,मन के आंसू छलक आते हैं,।।

राजनीति होनी चाहिए- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 10, 2021

 राजनीति होनी चाहिए राजनीति होनी चाहिए लोगों के बीच आपसी भाईचारा,प्रेम एवं सौहार्द बढ़ाने के लिए,मगर अफसोसराजनीति होती हैउनके बीच

झंडा दिवस- सुधीर श्रीवास्तव

December 10, 2021

झंडा दिवस आज सशस्त्र सेना झंडा दिवस है सात दिसंबर उन्नीस सौ उनचास कोये मनाया गया था पहली बारतब से

Leave a Comment