Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, Maa, poem

मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं

“मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं” जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य …


“मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं”

भावना ठाकर 'भावु' बेंगलोर

जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य से सर्जन हुई उस माँ की शान में क्या लिखूँ, लिखने को बहुत कुछ है पर आज बस इतना ही लिखूँ कि,

लिखी है मेरी माँ ने अपनी ममता की स्याही से मेरी तकदीर, रात-रात भर जाग कर मेरी ख़ातिरदारी में अपनी नींद गंवाई है कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं..

सिंचा है अपने खून से मेरी नस नस को, सहा है मेरी लातों को हंस-हंसकर जन्म पर मेरे तोड़ा है तन उस माँ की ममता के बदले कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं..

मेरे हंसने पर हंसी मेरे रोने पर तिलमिलाई है, मेरी माँ के उत्कृष्ट व्यक्तित्व का मैं आईना हूँ कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं..

तराशा है मेरी शख़्सियत को संस्कारों के गहनों से आँचल की छाँव देते रक्षा है ज़िंदगी के थपेडों से, कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं..

अपने हिस्से के निवालों से पाल पोष कर बड़ा किया उस माँ के अहसानों को भूलकर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं..

हर ग्रंथों का सार समझाते मेरे विचारों को समृद्ध किया, मेरे हर हुनर में हौसलों का तेल सिंचकर मुझे काबिल बनाया कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं..

मैं जो कुछ हूँ अपनी माँ की बदौलत हूँ, संसार रथ की सारथी ने मुझे नखशिख तराशा जब मैं अपने आप में काबिले तारीफ़ हूूँ तो कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं।

भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर

Related Posts

होली के रंग | Holi ke rang

March 24, 2024

होली के रंग लाल गुलाबी नीले पीले,कई रंगों से रंगी हुई होली आई होली आई, धरती लग रही सजी धजीरंग

कविता –अभिलाषा| kavita -Abhilasha

March 24, 2024

अभिलाषा अपने ही नभ में उड़ना मुझको,अपना संसार बनाना है। कोमल मन की अभिलाषा है,अंबर से ऊपर जाना है।कुरीतियों की

Kavita : सपने | sapne

March 24, 2024

सपने सपने देखो, और फिर अपने सपने साकार करो। इन सपनों को पाने के लिए, मेहनत तुम लगातार करो।नहीं थकना

Kavita : सबला नारी | sabla naari

March 24, 2024

सबला नारी किसने कहा अबला है नारी, नारी तो सब पर भारी है।मां,बहन, बेटी या सखी, सब के रूपों में

Jeevan ki pagdandi par by anishk

March 9, 2024

जीवन की पगडंडी पर जीवन की पगडंडी पर जीवन की पगडंडी परचलते-चलते जब शाम हुई,पैरों में तिनके लिपटे सेनींदें रातों

Stree | स्त्री पर कविता

March 8, 2024

स्त्री माँ , बहन,मित्र, प्रेमिका,सबमें मैंने देखी थोड़ी-थोड़ी स्त्री,किंतु विवाह के बाद पत्नी से मिल,मूड स्विंग जैसे नये टर्म सीखे,मैंने

Leave a Comment