Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Siddharth_Gorakhpuri

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम- सिद्धार्थ गोरखपुरी

कविता -मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम चतुर्भुज रूप में जन्म लियाअयोध्या को अनुराग दियामाँ कौशल्या के कहने परमूल रूप को त्याग दियाबाल्यकाल …


कविता -मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम- सिद्धार्थ गोरखपुरी
चतुर्भुज रूप में जन्म लिया
अयोध्या को अनुराग दिया
माँ कौशल्या के कहने पर
मूल रूप को त्याग दिया
बाल्यकाल में असुरों को
अंतिम गति तक था पहुँचाया
श्रीराम प्रभु ने सम्पूर्ण जगत को
अपना था पुरुषार्थ दिखाया
शंकर के कर को खंडित कर
ऐतिहासिक थे काम किए
फिर सिय स्वयंबर जीत लिए
और सिया के राम हुए
पिता के बचनों के खातिर
राज-पाट सब त्याग दिया
वनवासी बन चौदह वर्षो तक
वन में ही था निवास किया
सिय, लखन और रघुराई
वन -वन भटकते रहते थे
सिया -राम तनिक विश्राम थे करते
पर लक्ष्मण कभी न करते थे
मारीच सिया के समक्ष
मायामृग बन कर भ्रमण किया
श्रीराम प्रभु को था बहकाया
तब रावण ने सीता का हरण किया
सिय वियोग में राम प्रभु ने
धैर्य कभी न गँवाया था
तभी तो अनगिनत राक्षसों को
यमपुरी तक पहुंचाया था
श्रीराम प्रभु को हनुमान मिले
हनुमान को कृपानिधान मिले
वैसे तो श्रीराम प्रभु को
आजीवन व्यवधान मिले
सुग्रीव को था मित्र बनाया
बालि से उनका हक दिलवाया
न्याय के खातिर राम प्रभु ने
बालि को भी था मार गिराया
शरण में अंगद को लेकर
बालि के कथन का मान रखा
नर – बानर की सेना बनाई
सबका था सम्मान रखा
सत्य की सेना राम बनाए
दल में उनके विभीषण आए
विभीषण ने अमृत के राज बताए
युद्ध हुआ जब भीषण और भारी
तब रावण को मार गिराए
मरणासन्न रावण से भी
उसकी अंतिम इच्छा जानी
कहो तो तुम्हे जीवित कर दूँ
जो नहीं करोगे मनमानी
रावण ने राम प्रभु में
साक्षात् नारायण को था देखा
रावण का उद्धार तुम्ही करोगे
कहती तुम्हारे मस्तिष्क की रेखा
रावण के अंतिम निवेदन को
राम प्रभु ने स्वीकार किया
रावण को अंतिम गति देकर
ससम्मान उद्धार किया
मर्यादित रहकर राम प्रभु ने
बिना क्रोध के युद्ध किया था
रावण व अन्य राक्षसों से
पृथ्वी को था मुक्त किया था
सेना में फिर गूँज उठा
जय जय जय जय श्रीराम
ऐसे ही नहीं बन पाए थे
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

कविता -शहर

August 22, 2022

शहर गांवों के सपने  संभाल लेता है शहर  हो जाओ दूर कितना भी पास बुला लेता है शहर । गांवों

कविता -बुजुर्ग

August 21, 2022

बुजुर्ग घर का मानबुजुर्गों का सम्मानजीवन ज्ञान।। दादा की यादउनका आशीर्वादहम आबाद।। दादी सुकूनघर की शान रहीदुर्भाव नहीं।। है मात-पिताहमारे

हम फरिश्ते से हो जाएं!

August 21, 2022

हम फरिश्ते से हो जाएं! फरिश्तों की तलाश क्यों आसमान में,फरिश्ते तो है इसी जहान में,जो भी मानवता भलाई के

चल पहल कर!

August 19, 2022

 चल पहल कर! किसी के भरोसे क्यों रहना, सब करें उसके बाद क्यों करना, भेड़ चाल क्यों जरूरी है चलना,

महत्वपूर्ण उत्सव, अमृत महोत्सव!

August 14, 2022

महत्वपूर्ण उत्सव, अमृत महोत्सव! सदियों की गुलामी के पश्चात,100 वर्ष के विद्रोह के बाद,हुआ हमारा देश आजाद,15 अगस्त 1947 को,हुई

ऐसा मेरा हिंदुस्तान हो!!

August 14, 2022

ऐसा मेरा हिंदुस्तान हो! सभी का सम्मान हो,हम देश की शान हो,देश के लिए हमारे प्राण हो,देश हमारी जान हो,ऐसा

PreviousNext

Leave a Comment