Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Siddharth_Gorakhpuri

बता रहा है धुआँ – सिद्धार्थ गोरखपुरी

शीर्षक – बता रहा है धुआँ आदमी अंदर और बाहर उड़ा रहा है धुआँ तिल -तिल फेफड़ों को सड़ा रहा …


शीर्षक – बता रहा है धुआँ

बता रहा है धुआँ - सिद्धार्थ गोरखपुरी
आदमी अंदर और बाहर उड़ा रहा है धुआँ

तिल -तिल फेफड़ों को सड़ा रहा है धुआँ
ऊपर जाना और ले जाना मेरी फ़ितरत है
धूम्रपान करने वालों को बता रहा है धुआँ

अपनी जिंदगी को खतरे में डाल रहे हो
पहले तो यार तुम भी वाकमाल रहे हो
न परिवार की चिंता है न तुम्हे है खुदकी
खुद से कैसा बदला निकाल रहे हो
वो कहीं का न हुआ जिसका मैं हुआ
धूम्रपान करने वालों को बता रहा है धुआँ

अपनी जिंदगी के दिन ऐसे जाया न करो
अपने फेफड़ों को धुएँ से तड़पाया न करो
माना के ये लत बहुत ज्यादा गलत है
कश जरूरी है ये खुद को बताया न करो
आदमी खोद लेता है अपने मौत का कुआँ
धूम्रपान करने वालों को बता रहा है धुआँ

यह सिगरेट नहीं, एक मीठा जहर है
होता इसका आहिस्ता -आहिस्ता असर है
तुम खुद के साथ अपने परिवार की जिंदगी पी रहे हो,
तुम, तुम्हारा परिवार सब के सब बेखबर हैं
तुम खेल रहे हो सबकी जिंदगी पर जुआ
धूम्रपान करने वालों को बता रहा है धुआँ

-सिद्धार्थ गोरखपुरी
गोरखपुर उ. प्र.


Related Posts

दरख्त और कुल्हाड़ी- सुधीर श्रीवास्तव

December 18, 2021

दरख्त और कुल्हाड़ी अरे बेशर्म मानवों! कितने बेहया हो तुममगर तुम्हें क्या फर्क पड़ता हैतुम आखिर सुनते ही किसकी हो।

विजय दिवस- सुधीर श्रीवास्तव

December 18, 2021

विजय दिवस शुरू हुआ जो युद्ध तीन दिसंबर उन्नीस सौ इकहत्तर कोभारत पाकिस्तान के बीच मेंछुडा़ रहे थे सैनिक भारत

काम की कीमत है इंसान की नहीं-जितेन्द्र ‘कबीर’

December 17, 2021

काम की कीमत है इंसान की नहीं बेकारी, बेरोजगारी के दिनों मेंना कमाने का तानाजब तब मार देने वाले घरवाले,इंसान

व्यवधान- सिद्धार्थ गोरखपुरी

December 17, 2021

व्यवधान व्यवधान अनेकों जीवन मेंरह-रह कर उपजा करते हैंहम मन को थोड़ा समझाते हैंऔर वक़्त से सुलहा करते हैं तनिक

महँगाई – डॉ. इन्दु कुमारी

December 17, 2021

महँगाई पर्याप्त नहीं है कमाई कमर तोड़ दी महँगाईजनता कर रही है त्राहिसुन लो सुनो रे मेरे भाई । चलें

प्रेरणा- अनीता शर्मा

December 16, 2021

प्रेरणा! मेरे जीवन की प्रेरणा स्रोत है आपका आशीर्वाद! हर पल राह दिखाई सच्ची,हर पल साथ तुम्हारा था! जब-जब मैं

Leave a Comment