Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

बंद कमरों की घुटन-सुधीर श्रीवास्तव

 बंद कमरों की घुटन आधुनिकता की अंधी दौड़ में हमने खुद ही खुद को कैद कर लिया है कंक्रीट के …


 बंद कमरों की घुटन

सुधीर श्रीवास्तव

आधुनिकता की अंधी दौड़ में

हमने खुद ही खुद को कैद कर लिया है

कंक्रीट के घुटन भरे कमरों में।

खुली हवा में हमें अब साँस लेना भाता नहीं।

हम अपने ही हाथों उजाड़ रहे जंगल

पेड़ पौधे वनस्पतियां और

मिटाने पर आमादा हैं हरियाली का अस्तित्व।

वीरान हो रहे गांव गिरावट

जो बचे हैं कुछ कथित गरीबों सुविधाहीनों के लिए

वहां भी आधुनिकता का राक्षस तांडव कर रहा है,

शहरी संस्कृति से दो दो हाथ कर रहा है।

अब हर ओर घुटन ही घुटन है

क्योंकि हम आदी हो रहे हैं

घुटन भरे माहौल में,बंद कमरों में,

क्योंकि हमें प्रकृति पर भरोसा जो नहीं रहा

या यूं कहें हमने ही प्रकृति को दुश्मन समझ लिया।

कृत्रिमता से खुद को जोड़ लिया,

घुटन भरे बंद कमरों में जीने का फैसला

खुद हमने आपने जो कर लिया है। 

सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उत्तर प्रदेश
८११५२८५९२१
© मौलिक, स्वरचित
०६.०४.२०२२


Related Posts

कविता- हौंसला तुम्हारा…

March 7, 2023

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात हौंसला तुम्हारा…(कविता) हे नारी, हो पाक-पवित्र इतनी तुम,समाज ने टटोला हमेशा तुम्हें।पग-पग पर मज़ाक

मुस्कुराना सीख रही

March 6, 2023

मुस्कुराना सीख रही मुस्कुराना सीख रही हूँ तुम्हारे बिना जीना सीख रही हूँहाँ आज फिर से मुस्कुराना सीख रही हूँजो

मेहनत ज़रूर करो पर सब योग है

March 6, 2023

भावनानी के भाव मेहनत ज़रूर करो पर सब योग है किसी का ईश्वर अल्लाह पर अपार विश्वास है कोई नास्तिक

आओ ख़ुशी से जीने की आस कायम रखें

March 6, 2023

 भावनानी के भाव आओ ख़ुशी से जीने की आस कायम रखें आओ खुशी से जीने की आस कायम रखें हम 

वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है

March 6, 2023

भावनानी के भाव वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है रक्षा क्षेत्र में समझौतों के झंडे गाड़ रहे

कविता एकत्व | kavita ekatatva

March 5, 2023

  एकत्व  एकाकी, एकाकी, जीवन है एकाकी । मैं भी हूं एकाकी तू भी है एकाकी, जीवन पथ पर है

PreviousNext

Leave a Comment