Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, sudhir_srivastava

पैसे का खेल

 पैसे का खेल सुधीर श्रीवास्तव समय के साथ पैसा भी अब अपना रंग दिखाने लगा है, पैसे पर भी आधुनिकता …


 पैसे का खेल

सुधीर श्रीवास्तव
सुधीर श्रीवास्तव

समय के साथ पैसा भी अब

अपना रंग दिखाने लगा है,

पैसे पर भी आधुनिकता का 

अब तो रंग गहरा हो गया है ।

रिश्तों की पहचान में भी

पैसे का भाव बढ़ गया है,

आज अपने हों या पराए

पैसा सब कुछ हो गया है।

अब हर रिश्ता बेमानी है

ये कैसी गज़ब कहानी

माँ बाप हो या औलादें

पैसे से जाती पहचानी।

दरक रहा है समाज का

आज वातावरण देखिए,

पैसे का भूत सबके सिर पर

चढ़कर बोल रहा है जान लीजिए। 

सुधीर श्रीवास्तव

गोण्डा उत्तर प्रदेश

८११५२८५९२१

© मौलिक, स्वरचित

०६.०५.२०२२


Related Posts

प्रचार से परे है सच्चाई- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

प्रचार से परे है सच्चाई कानून के राज कीडींग हांकी जा रही है आजकल बहुत,लेकिन इस मामले मेंहत्या, बलात्कार, दबंगई

विघटन के बीज- जितेन्द्र ‘कबीर

March 25, 2022

विघटन के बीज एक घर के दो सदस्य,एक शाकाहारी पूर्णतःलेकिन दूसरे को मांसाहार भाए,खाने के ऊपर रोज ही उनकीआपस में

प्राथमिकता में नहीं- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

प्राथमिकता में नहीं जब सरकारें देने लगें सियासी लड़ाईयां जीतने परध्यान ज्यादाऔर ज़िंदगी की लड़ाई हार रहीजनता पर कम,तो समझ

प्रेम रहेगा हमेशा- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

प्रेम रहेगा हमेशा हम पहले इंसान नहींजो प्रेम में हैंऔर विश्वास करोकि हम आखिरी भी नहीं होंगे,नफरत, घृणा, स्वार्थ, हिंसाऔर

चुप्पी की कीमत- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

चुप्पी की कीमत अगर तुम्हारा कोई पड़ोसीकुछ हथियारों और गुण्डों के बल परधावा बोल देतुम्हारे घर पर कब्जे के लिए,तो

मौत के व्यापारी- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

मौत के व्यापारी नशे के व्यापार सेफायदा उठाने वाले लोगजब तक मौजूद हैं इस दुनिया में,नशामुक्त समाज के आह्वानऔर दावे

Leave a Comment