Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, satyawan_saurabh

पैदा क्यों होते नहीं, भगत सिंह से लाल।।

पैदा क्यों होते नहीं, भगत सिंह से लाल।। भगत सिंह, सुखदेव क्यों, खो बैठे पहचान। पूछ रही माँ भारती, तुम …


पैदा क्यों होते नहीं, भगत सिंह से लाल।।

पैदा क्यों होते नहीं, भगत सिंह से लाल।।

भगत सिंह, सुखदेव क्यों, खो बैठे पहचान।
पूछ रही माँ भारती, तुम से हिंदुस्तान।।

 
भगत सिंह, आजाद ने, फूंका था शंख नाद।
आज़ादी जिनसे मिले, रखो हमेशा याद।।
 
बोलो सौरभ क्यों नहीं, हो भारत लाचार।
भगत सिंह कोई नहीं, बनने को तैयार।।
 
भगत सिंह, आज़ाद से, हो जन्मे जब वीर।
रक्षा करते देश की, डिगे न उनका धीर।।
 
मरते दम तक हम करे, एक यही फरियाद।
भगत सिंह भूले नहीं, याद रहे आज़ाद।।
 
मिट गया जो देश पर, करी जवानी वार।
देशभक्त उस भगत को, नमन करे संसार।।
 
भारत माता के हुआ, मन में आज मलाल।
पैदा क्यों होते नहीं, भगत सिंह से लाल।।
तड़प उठे धरती, गगन, रोए सारे देव।
जब फांसी पर थे चढ़े, भगत सिंह, सुखदेव।।
 
भगत सिंह, आजाद हो, या हो वीर अनाम।
करें समर्पित हम उन्हे, सौरभ प्रथम प्रणाम।।

About author


डॉo सत्यवान ‘सौरभ’
कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट,
333, परी वाटिका, कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी) भिवानी, हरियाणा – 127045
facebook – https://www.facebook.com/saty.verma333
twitter- https://twitter.com/SatyawanSaurabh


Related Posts

सलोनी के कुसुम”- अनिता शर्मा झाँसी

January 25, 2022

सलोनी के कुसुम” इंसान बेइन्तहा मजबूर दिखा,कुसुम सी बालिकाएं तीर्थ पर,बेंच रही पूजा का सामान छोली में।चेहरे पर मुस्कान बिखेरी

हवाओं से बात- डॉ. माध्वी बोरसे!

January 25, 2022

हवाओं से बात! सनन सनन सी हवा मैं सांस लेते हुए खुलकर, जीते हैं अपने सारे दुख गम को भूल

संगीत-डॉ. माध्वी बोरसे!

January 25, 2022

संगीत! एक मधुर सी ध्वनि जब कानों में गुनगुनाती,मन को प्रसन्नता से भर जाती,योग की तरह होता है संगीत,हर एक

आभासी दुनियाँ- सरस्वती मल्लिक

January 25, 2022

आभासी दुनियाँ अद्भुत है बहुत ,यह आभासी दुनियाँप्यारी है बहुत ,जैसे सपनों की दुनियाँमित्र मिले यहाँ बहुत ,बनी नए रिश्तों

तू डोर मैं पतंग- अनिता शर्मा झाँसी

January 25, 2022

तू डोर मैं पतंग ईश्वर के हाथों में जीवन डोर-हम पतंग जैसे उड़ रहे।खींचता और ढील देता विधाताहम नाचते अंहकार

देश के वीर सपूतों में वीरांगना- डॉ. इन्दु कुमारी

January 25, 2022

देश के वीर सपूतों में वीरांगना वीरता की श्रृंखला में जुड़करप्रहरी बन आ रही है बहनाभाई हिम्मत नहीं है हारनाचल

Leave a Comment