Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Aalekh, lekh, Megha Rathi

पीड़ा जाते हुए उपहार दे जाएगी अगर…

पीड़ा जाते हुए उपहार दे जाएगी अगर… तड़पते– तड़पते इंसान सब्र करना सीख जाता है और यह तब होता है …


पीड़ा जाते हुए उपहार दे जाएगी अगर…

पीड़ा जाते हुए उपहार दे जाएगी अगर...

तड़पते– तड़पते इंसान सब्र करना सीख जाता है और यह तब होता है जब तड़प अपनी सीमा को पार कर बेइंतहा हो जाती है। वे पल जब उसे लगता है कि अब इस तड़प का अंत नहीं…यही नियति है उसकी ओर जब वह इस स्थिति को स्वीकार कर लेता है और अपनी बैचेनी का आदी होने लगता है उसी पल से व्यक्ति का मन सब्र करने की ओर बढ़ने लगता है।
पर क्या यह इतना आसान है जितना आसानी से इस बात को कह दिया गया…पढ़ लिया गया? नहीं, जिसने इसे अनुभव किया है वही समझ सकता है कि यह कितना कष्टप्रद था। वे पल जब इंसान बैचेन रहता है उनको बिताना कितना भारी होता है… आशाओं की किरणें कमजोर होते – होते जब दम तोड़कर अंधेरे में विलीन होने लगती हैं, उनकी छटपटाहट किसी दवाई से कम नहीं हो सकती, कोई निष्चेतक शून्य या अल्प नहीं कर पाता उस पीड़ा को।

मर्म भेदती पीड़ा जिसके विभिन्न उपाय सुझाए जाते हैं… ध्यान करो, चित्त कहीं और लगाओ आदि… वे सभी उपाय, प्रयत्न निष्फल रहते हैं क्योंकि हृदय की टीस मस्तिष्क को स्वयं से दूर नहीं जाने देती।रह रहकर वही विचार, वही स्थिति सामने आ जाती है जो इन सबका कारण है।
यह पीड़ा क्यों है? इस छटपटाहट का कारण क्या है? कारण मात्र एक है कि हमने स्वयं को उन दुखद स्थितियों के लिए तैयार नहीं रखा था। कोई भी नहीं रखता … कौन सोचता है कि कभी हमें अमुक व्यक्ति के कारण, अमुक स्थिति के कारण यूं पीड़ा का सामना करना होगा।
मनुष्य का आशावादी होना ही परिवार, समाज की प्रगति का कारक होता है। निराशा सफलता की ओर बढ़ना तो दूर, सोचने तक नहीं देती तब व्यक्ति आरंभ से ही ऐसे कैसे सोच सकता है अपितु वह तो भविष्य के सुनहरे सपने भी संजो लेता है।
किंतु धीरे–धीरे उसे आभास होता है कि उसने सही निर्णय नहीं लिया तब वह थोड़ा परेशान होता है,किसी भी प्रकार से स्थितियां अनुकूल करने का प्रयास करता है परंतु जब उसके समस्त प्रयास विफल होने लगते हैं तब उसे स्वयं पर संदेह होने लगता है कि संभवतः उसी में त्रुटि रही होगी।
स्वयं की कमी मान लेना खुद को परिष्कृत करने की ओर ले जाता है। व्यक्ति अपनी उन कमियों को दूर करने का प्रयत्न करता है और पुनः स्थिति सामान्य करने का प्रयास करता है।
मगर जब उसे ज्ञात होता है कि कमी उसकी नहीं थी बल्कि दूसरा व्यक्ति ही प्रयास नहीं कर रहा है या हालात ही साथ नहीं तब यह वेदना हृदय में घर बनाना आरंभ करती है। सब कुछ ठीक करने की ओर उठाये उसके हर प्रयत्न की असफलता पीड़ा की एक दीवार खड़ी करती जाती है।

पीड़ा और निराशा में डूबे व्यक्ति की सहायता कोई भी दूसरा व्यक्ति चाह कर भी नहीं कर पाता भले ही वह उसे इस दुख से बाहर आने के कितने ही रास्ते बताता रहे किंतु जब तक उस व्यक्ति का हृदय स्वयं को मजबूत बनाकर बाहर न निकलना चाहे तब तक यह संभव ही नहीं।

और यह स्थिरता…मजबूती आती है जब व्यक्ति स्थितियों को स्वीकार कर लेता है। स्थिति को स्वीकार करना संतोष का संबल बनता है।
सब्र आने के बाद व्यक्ति मजबूत होने लगता है आने वाली स्थितियों का सामना करने के लिए… यह मजबूती छटपटाहट क्षीण करने लगती है और समय के साथ व्यक्ति अपने मन पर काबू करना सीख लेता है और सुनने लगता है अपने मस्तिष्क की बातें।
हर कठिनाई में मित्र और संबंधी आपके साथ बेशक खड़े रहते हैं किंतु सबसे पहले व्यक्ति को खुद ही खुद की मदद करनी पड़ती हैं और समय ही इस सबमें कारगर होता है, समय ही मजबूत बनाता है व्यक्ति को।
जब कभी ऐसी स्थिति आए तो गलत कदम उठाने के पहले अपनी पीड़ा को चरम तक जाने देना क्योंकि उसके बाद ही वह धीरे–धीरे विलीन होगी परंतु जाते– जाते उपहार में सहनशीलता और मजबूती के विशेष गुण देकर जाएगी जो हर कठिनाई से पार जाने की इच्छाशक्ति बढ़ा देंगे।

About author 

मेघा राठी भोपाल, मध्य प्रदेश
मेघा राठी

भोपाल, मध्य प्रदेश


Related Posts

आने वाले वर्षों में इंसानों से ज्यादा होंगे रोबोट

आने वाले वर्षों में इंसानों से ज्यादा होंगे रोबोट

January 29, 2026

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स साथ-साथ कदम मिला रहे हैं, उसका परिणाम आने वाले वर्षों में अगर आपके आसपास इंसानों से

डॉ. मुल्ला आदम अली का बाल कहानी संग्रह ‘नन्हा सिपाही’: एक विस्तृत समीक्षा

डॉ. मुल्ला आदम अली का बाल कहानी संग्रह ‘नन्हा सिपाही’: एक विस्तृत समीक्षा

January 1, 2026

डॉ. मुल्ला आदम अली का बाल कहानी संग्रह ‘नन्हा सिपाही’ बाल मन की संवेदनाओं, जिज्ञासा और सपनों से जुड़ी कहानियों

“बीबीपुर: एक गांव की कहानी, जो अब किताबों में पढ़ाई जाएगी”

“बीबीपुर: एक गांव की कहानी, जो अब किताबों में पढ़ाई जाएगी”

July 28, 2025

“बीबीपुर: एक गांव की कहानी, जो अब किताबों में पढ़ाई जाएगी” हरियाणा का बीबीपुर गांव अब देशभर के छात्रों के

मार -पीट को पति का प्यार मानती हैं

मार -पीट को पति का प्यार मानती हैं

July 28, 2025

मार -पीट को पति का प्यार मानती हैं जी हाँ ये दो पंक्तिया इस लेख के भाव को पूरी तरह

तुलसी जयंती विशेष

तुलसी जयंती विशेष

July 28, 2025

तुलसीदास दुबे नाम के साथ ‘गोसाई’ शब्द लगने का रहस्य !!! (तुलसी जयंती विशेष ) उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले

तुम बोलो न-पत्र शैली कथा

तुम बोलो न-पत्र शैली कथा

July 28, 2025

तुम बोलो न तुम कम बोलते हो… बहुत कम। इतने दिनों में न जाने कितनी बार मैंने यह तुमसे सुना

Next

Leave a Comment