Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, sudhir_srivastava

नब्ज/नेता- सधीर श्रीवास्तव

नब्ज/नेता मैं नेता हूं मगर मैं दूसरे किस्म का नेता हूंगली गली नहीं भटकताजनता की नब्ज नहीं टटोलता,क्योंकि मुझे खुद …


नब्ज/नेता

नब्ज/नेता- सधीर श्रीवास्तव
मैं नेता हूं

मगर मैं दूसरे किस्म का नेता हूं
गली गली नहीं भटकता
जनता की नब्ज नहीं टटोलता,
क्योंकि मुझे खुद से प्यार है
जनता का क्या एतबार है?
मैं सत्ता के गलियारों में
सत्ता की नब्ज टटोलता हूं ,
सत्ता में रहने के लिए सूत्र ढूंढता हूं ।
अपनी पार्टी का अध्यक्ष भी हू्ँ
और कार्यकर्ता भी,
मैं खुद ही पूरी पार्टी हूँ।
ईमान धर्म से मेरा कोई न नाता है,
जनता की सेवा मुझे नहीं भाता है।
बस!मैं तो बस
अपनी भलाई चाहता हूँ,
जनता जाये भाड़ में
मैं कुछ नहीं जानता हूँ।
सत्ता के लिये मैं
कुछ भी कर सकता हूँ,
कुर्सी के लिए मैं नीचे तक गिर सकता हूँ,
इतना नीचे तक जहाँ आप लोग क्या
मैं खुद भी नहीं सोच सकता हूँ।
ये गुण हमें विरासत में मिले हैं
हमारे पूरखे भी ऐसे ही आगे बढ़े
मलाई काटे और शानोशौकत से
दुनियां छोड़ गये,
हमारे कँधों पर विरासत को
आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी डाल गये।
अब हम भी ईमानदारी से
उनके पद चिन्हों पर चल रहे हैं,
राजनीति का सुख भोग रहे हैं
जनता को उलझाए रखकर
अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंक रहे हैं,
राजनीति का आनंद ही नहीं
सत्ता का सुख भी भोग रहे हैं।

सधीर श्रीवास्तव
गोण्डा(उ.प्र.)
8115285921
©मौलिक, स्वरचित,


Related Posts

kavita kya hua by kundan kumar

June 7, 2021

  क्या हुआ थम चुकी ये वादियां रूक गई ये अबादियां उठ रही चिंगारियां क्या हुआ ……….? डरे-डरे हैं लोग

Gazal-azad gazal by ajay prasad

June 6, 2021

आज़ाद गज़ल मुझें साहित्यकार समझने की आप भूल न करें उबड़-खाबड़,कांटेदार रचनाओं को फूल न कहें। मेरी रचनाएँ बनावट और

kavita-tufaan by anita sharma

June 6, 2021

  “तूफान” कोरोना का संकट कम था क्या?जो,प्राकृत आपदा टूट पड़ी । कहीं घरों में पानी घुसा,कहीं आँधी से वृक्ष

kavita- sab badal gya by jitendra kabir

June 6, 2021

सब बदल गया है आजादी के परवानों ने कुर्बान किया खुद को जिनकी खातिर, उन आदर्शों के लिए देश के

kavita sangharsh by mosam khan alwar

June 6, 2021

संघर्ष संघर्ष है जिसके जीवन में उसे जीवन का सार हैनित जीवन में करते हम संघर्ष जीवन का आधार हैउठ

Kavita-paap nhi hai pyar by devendra arya

June 6, 2021

 पाप नहीं है प्यार अपने प्यार को कभी ऐसे नहीं सरापते हज़ूर कि श्राप लग जाए पूछ पछोर कर नहीं

Leave a Comment