Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Siddharth_Gorakhpuri

देर लगेगी- सिद्धार्थ गोरखपुरी

देर लगेगी बदल गया जमाना है…. जरा देर लगेगीन कोई ठौर ठिकाना है…..जरा देर लगेगीतुम होते जो कुत्ते! तो लेते …


देर लगेगी

देर लगेगी- सिद्धार्थ गोरखपुरी
बदल गया जमाना है….
जरा देर लगेगी
न कोई ठौर ठिकाना है…..
जरा देर लगेगी
तुम होते जो कुत्ते!
तो लेते पाल तुम्हे…
तुम अनाथ बच्चे हो!
जरा देर लगेगी

कुत्ते प्यारे लगते हैं
पर देशी वाले नहीं…
तुम तो इंसान के बच्चे हो…
जरा देर लगेगी
तुम अनाथ बच्चे हो!
जरा देर लगेगी

हम रुतबे वाले हैं
तुम मैले -कुचैटे रहते हो
साथ तुम्हे ले जाएं तो….
इज्जत को ठेस लगेगी
तुम अनाथ बच्चे हो!
जरा देर लगेगी

हमें कुत्तों से मोहब्बत है
हम समझते हैं इनको…
इंसानों को समझने में
जरा देर लगेगी
तुम अनाथ बच्चे हो!
जरा देर लगेगी

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

सभ्यता का कलंक

June 24, 2022

 सभ्यता का कलंक जितेन्द्र ‘कबीर’ बंदरों के झुंड का सरदार अपनी शारीरिक शक्ति के बल पर संसर्ग करता है अपने

नफरत की आग

June 24, 2022

 नफरत की आग जितेन्द्र ‘कबीर’ आग! आग से बुझती नहीं कभी, बुझती है रेत या फिर पानी से, नफरत की

ईश्वर क्या है?

June 24, 2022

 ईश्वर क्या है? जितेन्द्र ‘कबीर’ एक उम्मीद है! कुछ अच्छा होने की, अपने जीवन में कठिनाइयों से जूझते इंसान के

ऐसे बदलाव नहीं आएंगे

June 24, 2022

 ऐसे बदलाव नहीं आएंगे जितेन्द्र ‘कबीर’ सिर्फ इसलिए कि हमें बुरा लगता है देखना… देश को दंगे-फसादों में जलते हुए,

कोई क्या कर पाएगा?

June 24, 2022

 कोई क्या कर पाएगा? जितेन्द्र ‘कबीर’ बहुत मेधावी होगा अगर किसी का बच्चा तो डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी, खिलाड़ी या

दुनियादारी

June 24, 2022

 दुनियादारी जितेन्द्र ‘कबीर’ बड़े खुश थे सभी चुप रहा करते थे जब तक, जरा सी जुबान जो खोली तो शिकवे

PreviousNext

Leave a Comment