Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

तोड़ा क्यों जाए?- जितेन्द्र ‘कबीर

तोड़ा क्यों जाए? गुलाब!तुम सलामत रहनाअपनी पत्तियों, टहनियों, जड़ों,परिवेश और वजूद के साथ,तुम्हारी महक और खूबसूरतीका इस्तेमाल नहीं करना है …


तोड़ा क्यों जाए?

तोड़ा क्यों जाए?- जितेन्द्र 'कबीर

गुलाब!
तुम सलामत रहना
अपनी पत्तियों, टहनियों, जड़ों,
परिवेश और वजूद के साथ,
तुम्हारी महक और खूबसूरती
का इस्तेमाल नहीं करना है मुझे
अपने स्वार्थ के लिए,
तुम्हें तुम्हारी बगिया में
फलते-फूलते देखकर कर लूंगा मैं तुष्टि
अपने सौंदर्य बोध की,
तुम कुछ दिन बाद मुरझाकर
मर भी जाओगे
तो मुझे तसल्ली रहेगी कि
आखिरी समय में तुम
अपनों के साथ थे,
कि मेरी नज़र में गुनाह है
किसी को भी अपनी जड़ों से
दूर करना,
उसके परिवेश से दूर
उसे तिल-तिल मरने पर
मजबूर करना

जितेन्द्र ‘कबीर
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति – अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

Sakaratmak urja by Anita Sharma

September 4, 2021

 सकारात्मक ऊर्जा* हे मानुष तू न हो निराश। कर्म पथ पर बढ़ता चल  राह कठिन एकाकी होगी पर दायित्व संभाले

Sathi hath badhana by Anita Sharma

September 4, 2021

 *साथी हाथ बढ़ाना* साथी हाथ बढ़ाना, एक अकेला थका हारा हो, साथ साथ बढ़ना उसके। हाथों को थामे रखना अपनो

Anath tere bin by Indu kumari

September 4, 2021

 श्री कृष्ण जन्मोत्सव   अनाथ तेरे बिन  आधी रात को जन्म भये कारावास का खुले वज्र कपाट दैत्य प्रहरी सो गए 

Sikhane ki koshish by Jitendra Kabir

September 4, 2021

 सिखाने की कोशिश करें सिखाने की कोशिश करें अपने बच्चों को खाना बनाना भी पढ़ाई के साथ-साथ, वरना  लाखों के

Nishkam karm by Anita Sharma

September 4, 2021

 निष्काम कर्म हम कर्म करें निषकर्म भाव से। हो सेवा निष्कर्म भावों की। न अपेक्षा रखे किसी से। न उपेक्षित

Barsaat ki ek rat by Anita Sharma

September 4, 2021

बरसात की एक रात   इक रात अमावस की थी,         बरसता था पानी। रह-रह कर दामिनी

Leave a Comment