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Anita_sharma, poem

तू डोर मैं पतंग- अनिता शर्मा झाँसी

तू डोर मैं पतंग ईश्वर के हाथों में जीवन डोर-हम पतंग जैसे उड़ रहे।खींचता और ढील देता विधाताहम नाचते अंहकार …


तू डोर मैं पतंग

तू डोर मैं पतंग- अनिता शर्मा झाँसी
ईश्वर के हाथों में जीवन डोर-
हम पतंग जैसे उड़ रहे।
खींचता और ढील देता विधाता
हम नाचते अंहकार में–
नचाता है विधाता।

है कठपुतली हम और…..

पतंग की डोर थामता ईश्वर ।
जिस ओर कर्म का प्रारब्ध ले जाता—
हम बस पंतग बन उड़ान भरते।
हम बस पतंग समान बल खाते—डोर ईश संभालता।।

अनिता शर्मा झाँसी
मौलिक रचना


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