तुम और मैं | Tum aur main
तुम और मैं तुम घुमाते बल्ला क्रिकेट के,मैं घुमाती कंघी बालों में तुम बात करते किताबों से, मैं बनाती बातें …
Related Posts
पापा मैं बोझ नहीं
September 24, 2022
विश्व बालिका दिवस पर विशेष 💓 पापा मैं बोझ नहीं 💓 मम्मी – पापा मैं बेटी हूँ आपकीपर , क्या
पिता के लिए कोई शब्द नहीं
September 22, 2022
कविता पिता के लिए कोई शब्द नहीं पिता की ज्ञानवर्धक बातों को अनुशासन से समझते नहींपिता के लिए कोई शब्द
कविता– उस दिन ” दशरथ केदारी ” भी मरा था !
September 22, 2022
कविता- उस दिन ” दशरथ केदारी ” भी मरा था ! उस दिन बहुत गहमागहमी थी जब एक हास्य कलाकार
सोच को संकुचित होने से बचाएं।
September 21, 2022
सोच को संकुचित होने से बचाएं। अपनी सोच को संकुचित ना होने दें,इस अपार समझ को कभी ना खोने दें,असीम
मेरी दर्द ए कहानी
September 19, 2022
मेरी दर्द ए कहानी ना हो कभी किसी की भी मेरी तरह जिंदगानीना हो कभी किसी कीमेरी तरह आंखों में
कविता-सहज़ता में संस्कार उगते हैं
September 17, 2022
कविता-सहज़ता में संस्कार उगते हैं अपने आपको सहज़ता से जोड़ो सहज़ता में संस्कार उगते हैं सौद्राहता प्रेम वात्सल्य पनपता है

