तुम और मैं | Tum aur main
तुम और मैं तुम घुमाते बल्ला क्रिकेट के,मैं घुमाती कंघी बालों में तुम बात करते किताबों से, मैं बनाती बातें …
Related Posts
धनतेरस के दिन मैंने अपनी मां को खोया
October 19, 2022
धनतेरस 2020 के दिन मैं अपनी मां के साथ बैठा था अचानक उसे साइलेंट अटैक आया और मेरी नजरों के
पता नहीं क्यों
October 17, 2022
कविता –पता नहीं क्यों मुझे घर का कोइ एक सख्श याद नहीं आता। मुझे याद आता है वो भाव, वो
तेरे इश्क में
October 17, 2022
तेरे इश्क में तेेरे नाम से ये शामआबाद हो गया कुछ लिखने जो हम बैठेखाली दवात हो गया तुझे सोचा
दिव्य प्रकाश।
October 17, 2022
दिव्य प्रकाश। ऐसा प्रकाश हम बने,दिव्य उजाला लेकर आए,अंधेरे है जीवन में बहुत घने,हम भी थोड़ी रोशनी बन जाए। अपने
आओ मिलकर जीवन बचाएं।
October 17, 2022
आओ मिलकर जीवन बचाएं। धीरे-धीरे पर्यावरण हो रहा है प्रदूषित,वायु, जल, भूमि सब हो रहा है दूषित,बढ़ती जा रही है
गलती करो पर पछतावा नहीं।
October 17, 2022
गलती करो पर पछतावा नहीं। गलती करो पर पछतावा की जगह,उस गलती से सीखो,पछतावे के दर्द में रोने की जगह,बल्कि

