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तर्पित करते मुर्दे

 व्यंग्य तर्पित करते मुर्दे हमारे राजनैतिक गिद्ध और बाबू अफसरान लोग मुर्दों का बखूबी उपयोग जानते हैं l मुर्दों का …


 व्यंग्य

तर्पित करते मुर्दे

हमारे राजनैतिक गिद्ध और बाबू अफसरान लोग मुर्दों का बखूबी उपयोग जानते हैं l मुर्दों का उपयोग फाइलों में ये गिद्ध जीवित व्यक्ति की तरह करते हैं l ये बात अगर जानकारी के लिये पूछी जाये की मुर्दों का सही उपयोग और , कौन – कौन से लोग करना जानते हैं l तो इसकी एक लंबी फेहरिस्त होगी l जिसमें चील- कौओं , और गिद्धों का नाम बाद में आयेगा l इन व्यवस्था के गिद्धों का नाम पहले आयेगा l 

ये गिद्ध आदमी का माँस नहीं खाते बल्कि साबुत आदमी को ही निगल जातें हैं l हर सरकारी विभाग में ऐसे गिद्ध भरे पड़े हैं l वे पूर्णमासी के चाँद की तरह इन मुर्दों का इंतजार करते हैं l या प्रेम में विकल प्रेमी / प्रेयसी की तरह ! जिसका इंतजार हमारी कमीशन खोर व्यवस्था को हर पल रहता है l वृद्धा पेंशन , विधवा पेंशन , और विकलांग होते हुए भी ये मुर्दे जिंदा होकर अपने पूर्वजों से तर्पण माँगना छोड़कर l व्यवस्था को तर्पित करते रहते हैं l व्यवस्था का पितृपक्ष साल भर में बारहों महीनों का होता है l कभी -कभी औचक निरीक्षण या जाँच के दौरान इन फाइलों के मुर्दों की पोल खुल जाती है l

राजनैतिक गिद्ध धर्म के नाम पर इन मुर्दों का बखूबी इस्तेमाल करते हैं l बिना आग के ही ये सांप्रदायिक माहौल बनाकर जिंदा लोगों को मुर्दों के नाम पर लड़वाते हैं l 

 जिसमें निर्दोष और बेकसों की जान जाती है l अपनी इस लाचारी पर मुर्दे भी जार – जार रोते होंगे ! 

इधर एक नयी सनक मुर्दे को शराब बेचने की हुई है l मुर्दा बार का बाकायदा लाईसेंस लेकर शराब बेचने लगा है l 

 जरूर वो मुर्दा शराबी रहा होगा l तभी बार खोलकर शराब बेचने का धँधा कर रहा है l वैसे मुर्दों के माध्यम से सफेदपोश भी शराब बेचने लगे हैं l ये दीगर बात है कि नाहक ही ये मुर्दे बदनाम होते हैं l

मुर्दों के लिये वैधव्य का दंश झेल रही महिलायें भी इंतजार करतीं हैं l जिनकी हर रात मुर्दे की याद में रीतती रहती है l आँखों के आँसू कभी नहीं सूखते ! ये मुर्दे उनके लिये कभी साबुत आदमी हुआ करते थें l जो हँसते थें , हँसाते थें l चुहल करते थें l उनका मस्ती – मजाक इन विधवाओं को हमेशा कचोटता रहता है !

 हर , सावन ऐसे ही बरस कर उन्हें सूखा छोड़ जाता है !  

About author 

Mahesh kumar Keshari
परिचय – 
नाम – महेश कुमार केशरी
जन्म -6 -11 -1982 ( बलिया, उ. प्र.) 
शिक्षा – 1-विकास में श्रमिक में प्रमाण पत्र (सी. एल. डी. , इग्नू से) 
2- इतिहास में स्नातक ( इग्नू से) 
3- दर्शन शास्त्र में स्नातक ( विनोबा भावे वि. वि. से) 
अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशन – सेतु आनलाईन पत्रिका (पिटसबर्ग अमेरिका से प्रकाशित) .
राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन- वागर्थ , पाखी , कथाक्रम, कथाबिंब , विभोम – स्वर , परिंदे , गाँव के लोग , हिमप्रस्थ , किस्सा , पुरवाई, अभिदेशक, , हस्ताक्षर , मुक्तांचल , शब्दिता , संकल्य , मुद्राराक्षस उवाच , पुष्पगंधा , 
अंतिम जन , प्राची , हरिगंधा, नेपथ्य, एक नई सुबह, एक और अंतरीप , दुनिया इन दिनों , रचना उत्सव, स्पर्श , सोच – विचार, व्यंग्य – यात्रा, समय-सुरभि- अनंत, ककसार, अभिनव प्रयास, सुखनवर , समकालीन स्पंदन, साहित्य समीर दस्तक, , विश्वगाथा, स्पंदन, अनिश, साहित्य सुषमा, प्रणाम- पर्यटन , हॉटलाइन, चाणक्य वार्ता, दलित दस्तक , सुगंध, 
नवनिकष, कविकुंभ, वीणा, यथावत , हिंदुस्तानी जबान, आलोकपर्व , साहित्य सरस्वती, युद्धरत आम आदमी , सरस्वती सुमन, संगिनी,समकालीन त्रिवेणी, मधुराक्षर, प्रेरणा अंशु , तेजस, दि – अंडरलाईन,शुभ तारिक , मुस्कान एक एहसास, सुबह की धूप, आत्मदृष्टि , हाशिये की आवाज, परिवर्तन , युवा सृजन, अक्षर वार्ता , सहचर , युवा -दृष्टि , संपर्क भाषा भारती , दृष्टिपात, नव साहित्य त्रिवेणी , नवकिरण , अरण्य वाणी, अमर उजाला, पंजाब केसरी , प्रभात खबर , राँची एक्स्प्रेस , दैनिक सवेरा , लोकमत समाचार , दैनिक जनवाणी , सच बेधड़क , डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट , नेशनल एक्स्प्रेस, इंदौर समाचार , युग जागरण, शार्प- रिपोर्टर, प्रखर गूंज साहित्यनामा, कमेरी दुनिया, आश्वसत के अलावे अन्य पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित . 
 चयन – (1 )प्रतिलिपि कथा – प्रतियोगिता 2020 में टाॅप 10 में कहानी ” गिरफ्त ” का चयन  
(2 ) पच्छिम दिशा का लंबा इंतजार ( कविता संकलन )
जब जँगल नहीं बचेंगे ( कविता संकलन ), मुआवजा ( कहानी संकलन ) 
(3)संपादन – प्रभुदयाल बंजारे के कविता संकलन ” उनका जुर्म ” का संपादन..
(4)-( www.boltizindgi.com) वेबसाइट पर कविताओं का प्रकाशन
(5) शब्द संयोजन पत्रिका में कविता ” पिता के हाथ की रेखाएँ “
 का हिंदी से नेपाली भाषा में अनुवाद सुमी लोहानी जी द्वारा और ” शब्द संयोजन ” पत्रिका में प्रकाशन आसार-2021 अंक में.
(6) चयन – साझा काव्य संकलन ” इक्कीस अलबेले कवियों की कविताएँ ” में इक्कीस कविताएँ चयनित
(7) श्री सुधीर शर्मा जी द्वारा संपादित ” हम बीस ” लघुकथाओं के साझा लघुकथा संकलन में तीन लघुकथाएँ प्रकाशित 
(8) सृजनलोक प्रकाशन के द्वारा प्रकाशित और संतोष श्रेयंस द्वारा संपादित साझा कविता संकलन ” मेरे पिता” में कविता प्रकाशित 
(9) डेली मिलाप समाचार पत्र ( हैदराबाद से प्रकाशित) दीपावली प्रतियोगिता -2021 में ” आओ मिलकर दीप जलायें ” कविता पुरस्कृत
(10) शहर परिक्रमा – पत्रिका फरवरी 2022- लघुकथा प्रतियोगिता में लघुकथा – ” रावण” को प्रथम पुरस्कार
(11) कथारंग – वार्षिकी -2022-23 में कहानी ” अंतिम बार ” 
प्रकाशित
(12)व्यंग्य वार्षिकी -2022 में व्यंग्य प्रकाशित 
(13) कुछ लघुकथाओं और व्यंग्य का पंजाबी , उड़िया भाषा में अनुवाद और प्रकाशन 
(14)17-07-2022 – वर्ल्ड पंजाबी टाइम्स चैनल द्वारा लिया गया साक्षात्कार 
(15) पुरस्कार – सम्मान – नव साहित्य त्रिवेणी के द्वारा – अंर्तराष्ट्रीय हिंदी दिवस सम्मान -2021
संप्रति – स्वतंत्र लेखन एवं व्यवसाय
संपर्क- श्री बालाजी स्पोर्ट्स सेंटर, मेघदूत मार्केट फुसरो, बोकारो झारखंड -829144


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