Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Anita_sharma, poem

तन्हा सी!!!!

 तन्हा सी!!!! अनिता शर्मा भीड़ में तन्हा-तन्हा सी, कुछ सकुचाई कुछ शरमाई। कह न सकी दिल की बातें, मन ही …


 तन्हा सी!!!!

अनिता शर्मा झाँसी
अनिता शर्मा

भीड़ में तन्हा-तन्हा सी,

कुछ सकुचाई कुछ शरमाई।

कह न सकी दिल की बातें,

मन ही मन सब बोल दिया।

नजरों ने सब जज्बात पढ़े,

आंखो से जुड़े बातों के तार।

लब फिर भी खामोश रहे,

कुछ सकुचाई कुछ शरमाई।

नजरें उठती गिरती प्रतिक्षण,

शीश झुका लौटी प्रति क्षण।

इक प्रीत निराली मन ही मन में,

दुनिया की चकाचौंध से दूर रही।

हाँ सकुचाई कुछ शरमाई सी,

भीड़ भाड़ में तन्हा सी।।

—-अनिता शर्मा झाँसी

—-मौलिक रचना


Related Posts

खालसा-हरविंदर सिंह ”ग़ुलाम”’

June 5, 2022

 खालसा अंतर्मन में नाद उठा है  कैसा ये विस्माद उठा है  हिरण्य कश्यप के घर देखो  हरी भक्त प्रह्लाद उठा

साहित्यकार महान

June 4, 2022

 साहित्यकार महान शब्दों के महाजाल का चक्रव्यूह बड़ा जंजाल इसमें उलझ सुलझ बने तीखे शब्द विकार लेखक है रोक ना

मदर अर्थ, पृथ्वी!

June 4, 2022

 मदर अर्थ, पृथ्वी! मैं हूं सौरमंडल की सबसे सुंदर ग्रह,जहां जीव जंतु का जीवन है संभव,निवास करती है मुझ में

शिकायतें ना करें!

June 4, 2022

 शिकायतें ना करें! क्यों करें किसी से शिकायत, क्या स्वयं हे हम इसके लायक, खुद को आईने मैं झांके तो,

संपूर्ण निष्ठा!

June 4, 2022

 संपूर्ण निष्ठा! बुरा वक्त दर्द दे जाता है, अच्छे वक्त की उम्मीद भी लाता है, दोनों का एहसास भी जरूरी

मां का असीम प्रेम

May 26, 2022

 मां का असीम प्रेम! सबसे भोली , प्यारी हे मां, है यह तो प्रेम की प्रतिमा, इसकी गोदी में बसा

PreviousNext

Leave a Comment