Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, sudhir_srivastava

डरने लगा हूँ मैं

 डरने लगा हूँ मैं सुधीर श्रीवास्तव वो छोटा होकर  कितना बड़ा हो गया है, बड़ा होकर भी बहुत छोटा हो …


 डरने लगा हूँ मैं

सुधीर श्रीवास्तव
सुधीर श्रीवास्तव

वो छोटा होकर  कितना बड़ा हो गया है,

बड़ा होकर भी बहुत छोटा हो गया हूँ मैं,

डरता तो नहीं हूं मैं किसी से मगर

उससे मिलकर डरने लगा हूँ मैं।

मिले थे हम पहली बार जब आमने सामने

दिया जो प्यार उसने उसी में खो गया हूँ,

उसके प्यार का जाने ये कैसा असर है

उसके सामने भीगी बिल्ली बन गया हूँ मैं।

वो अपना फ़र्ज़ निभाता चला आ रहा है

अपने फ़र्ज़ की राह में मैं रोड़ा हो गया हूँ,

उसने तो अपना दर्द पीना सीख लिया है,

उसके दर्द से अब मैंने रोना सीख लिया है।

बड़ा विश्वास था मुझे अपने जज्बातों पर

रोता तो हूँ मगर आँसू पीना सीख लिया है,

कुछ समझ आता नहीं क्या हो गया ऐसा

डरता भी नहीं हूं, फिर भी डरने लगा हूँ मैं। 

सुधीर श्रीवास्तव

गोण्डा उत्तर प्रदेश

८११५२८५९२१

© मौलिक, स्वरचित

०४.०५.२०२२


Related Posts

उनके आने से। Unke aane se

February 16, 2023

उनके आने से। एक सफर थम सा गया था, ह्रदय में, गम सा भरा था,जीवन तन्हा और अकेला मन,कैसे देखे,

ऐसा बिल्कुल पता न था | aisa bilkul pta na tha

February 16, 2023

भावनानी के भाव ऐसा बिल्कुल पता न था ऐसा जोरदार विकास होगा बिल्कुल भी पता न था व्यक्तिगत विकास के

गड्डियों का पहाड़ घर में खड़ा किया हूं

February 16, 2023

भावनानी के भाव गड्डियों का पहाड़ घर में खड़ा किया हूं  अपने इतने सालों की मौजमस्ती वाली सेवा जिसमे रोज़

जीवन जीने की कला| jeevan jeene ki kala

February 9, 2023

जीवन जीने की कला। जीवन जीने की कला,जिसने सीखी, वही आगे चला,उत्कृष्ट व्यवहार एवं विनम्रता,रखने वाला ही जीवन को सही

कविता –यादो का दुशाला | yadon ka dushala

February 8, 2023

कविता -यादो का दुशाला अद्भुत और अनोखा है ..तुम्हारी यादों का दुशाला, हमेशा टंगा रहता है कांधे पर, ठंड लगती

Bharat desh par kavita

February 7, 2023

कविता भारत देश महान, मेरी आन बान शान भारत देश महान, मेरी आन बान शानधर्मनिरपेक्षता हैं, भारत की पहचानहर धर्म

PreviousNext

Leave a Comment