Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल”-हेमलता दाहिया.

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल” बात बात में शामिल हैं,जाति धर्म के बोल.खोखले वादे खोल रहे हैं,हैं विकास …


“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल”

"टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल"-हेमलता दाहिया.
बात बात में शामिल हैं,जाति धर्म के बोल.
खोखले वादे खोल रहे हैं,हैं विकास की पोल.
पर पीड़ा ना पड़त दिखाईं,दूर सुहावना ढ़ोल.
टुकड़े टुकड़े में बिखरी,मेरी धरा अनमोल.

बड़ी बड़ी बाते ये करते,मुंह में दही शक्कर घोल.
कर्ज में डूबी हैं जनता,फटी पड़ी है खोल.
महंगाई सुरसा सी मुंह फाड़े,निकले ना मुंह से बोल.
टुकड़े टुकड़े में बिखरी ,मेरी धरा अनमोल..

रुकी रुकी है गति जीवन की,मिले ना कोई हमजोल.
ख़तम हुई रिश्तों की सच्चाई,सब संबंध हैं गोलमोल.
आपस में लड़ते भीड़ते है,कड़वी बोली बोल..
टुकड़े टुकड़े में बिखरी,मेरी धरा अनमोल.

हेमलता दाहिया.
सेमरिया ,जिला रीवा,
मध्यप्रदेश


Related Posts

कितनी हैरानी की बात है!- जितेन्द्र ‘कबीर

January 7, 2022

कितनी हैरानी की बात है! कितनी हैरानी की बात हैकि भौतिक जीवन की सार हीनता औरमृत्यु को सहज भाव से

नशा एक परछाई-जयश्री बिरमी

January 7, 2022

नशा एक परछाई क्यों चाहिए तुम्हे वो नशाजो तुम्हे और तुम्हारे प्यारोंको करता बरबाद हैं नशा करों अपने काम काया

द्विधा में लोकतंत्र- जयश्री बिरमी

January 7, 2022

 द्विधा में लोकतंत्र  विरोध किसका संस्कृति का? क्यों हमारे समाज में कोई भी प्रश्न नहीं होने के बावजूद प्रश्नों को

सुबह- चन्दा नीता रावत

January 7, 2022

। । सुबह ।। सुबह सवेरे जब रात ढले सूर्य की किरणें पृथ्वी पर आतीपृथ्वी के हरे चादर पर लालिमा

गगन की बुलन्दीयो को छुना- चन्दानीता रावत

January 7, 2022

गगन की बुलंदियों को छूना हैं  उड़ना है हमे उड़ना हैगंगन की बुलंदियों को छूना हैआँखो के हसीन ख्वाब कोवास्तविकता कर जीना

जानना – चन्दानीता रावत

January 7, 2022

।।जानना ।। सृष्टि पर आये हो तो जानना सीखोजान जाओ परिस्थियो कोपरिवेश को तुम जानना सीखो सीख जाओगे तू जिन्दगी

Leave a Comment