Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Siddharth_Gorakhpuri

जाति -पाति- -सिद्धार्थ गोरखपुरी

जाति -पाति जाति-पाति में मत उलझो ,रहना है हमें हर ठाँव बराबर।सिर के ऊपर सूरज तपता ,तो पाँव केनीचे छाँव …


जाति -पाति

जाति -पाति-  -सिद्धार्थ गोरखपुरी
जाति-पाति में मत उलझो ,रहना है हमें

हर ठाँव बराबर।
सिर के ऊपर सूरज तपता ,तो पाँव के
नीचे छाँव बराबर।
चमड़े का है रंग अलग पर लहू एक जैसा
ही है,
खुशी महसूस बराबर होती ,महसूस होता
हर घाव बराबर।
जाति-पाति में मत उलझो ,रहना है हमें
हर ठाँव बराबर।
भावना एक जैसी अपनी और सच मे भाव एक ही हो।
एक दूसरे के साथ चलें और हमारा लगाव एक ही हो।
दोनों मिल पतवार चलाएंगे ,तो चलेगी
अपनी नाँव बराबर।
जाति-पाति में मत उलझो ,रहना है हमें
हर ठाँव बराबर।
आज नया रूप रंग है पर एक शरीर के हिस्से हैं।
हमारा लहू एक ही है ,हम नहीं पुराने किस्से हैं।
शरीर भले बिचलित होता ,पर मन का है
ठहराव बराबर।
जाति-पाति में मत उलझो ,रहना है हमें
हर ठाँव बराबर।

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

राधा की पीड़ा- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

January 6, 2022

राधा की पीड़ा चल केशव बरसाना जाना,रूठ गयी जहां राधा रानी ,वृंदावन को भूल गयी है ,अपनों से भी रूठ

देर लगेगी- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 6, 2022

देर लगेगी बदल गया जमाना है…. जरा देर लगेगीन कोई ठौर ठिकाना है…..जरा देर लगेगीतुम होते जो कुत्ते! तो लेते

बताओ न कैसे रहते हो ?–सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 6, 2022

सड़क किनारे रहने वाले ग़रीब बेघरों को समर्पित रचना-बताओ न कैसे रहते हो मौसम ठंडा सूरज मद्धमऊपर से बदन पर

नई आस- जयश्री बिरमी

January 6, 2022

नई आस बहुत दिनों के बाद अब जगी हैं एक नई आसहर्षोल्लास के दिन भी थे ये दिलाती हैं एहसास

अलविदा- सुधीर श्रीवास्तव

January 6, 2022

अलविदा अब तुम जा रहे होन तनिक सकुचा रहे हो,लगता है बड़े बेशर्म हो गये हो।जाओ न हम भी कहां

जन्म सफल हो जायेगा-अंकुर सिंह

January 6, 2022

*जन्म सफल हो जायेगा* मिला मानव जीवन सबको, नेक कर्म में सभी लगाएं।।त्याग मोह माया, द्वेष भाव,प्रभु भक्ति में रम

Leave a Comment