Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, sudhir_srivastava

गाँधी जी तुम्हें प्रणाम- सुधीर श्रीवास्तव

गाँधी जी तुम्हें प्रणाम हे बापू हे राष्टृपिता संत साबरमती केपुजारी अहिंसा केतुम्हें नमन हैकोटि कोटि प्रणाम है।देश में आज …


गाँधी जी तुम्हें प्रणाम

गाँधी जी तुम्हें प्रणाम- सुधीर श्रीवास्तव
हे बापू हे राष्टृपिता

संत साबरमती के
पुजारी अहिंसा के
तुम्हें नमन है
कोटि कोटि प्रणाम है।
देश में आज जो हो रहा है
जिन्ना भक्तों की बाढ़ आ रही है
हिंदू मुसलमान का खेल
खुलेआम हो रहा है।
जाने क्या सोचकर
धर्म निरपेक्षता का
ढिंढोरा पीटते रहे आप,
दोनों का ही ताप आज
सह रहे हैं आप।
गफलत में लोग अब तक
पूजते रहे आपको,
पर आज सरेआम कोस रहे हैं आपको।
राष्टृपिता जी आपने
ये क्या कर दिया था,
हिंदुओं को हिंदुस्तान आने
और मुस्लिमों को पाकिस्तान
जाने क्यों नहीं दिया था?
आज तक हिंदुस्तान पाकिस्तान
दुश्मन बने हुए हैं,
रोज रोज नये नये लफड़े हो रहे हैं।
आप सत्य अहिंसा के पुजारी थे
पर आज सत्य अहिंसा के
बढ़ रहे व्यापारी हैं,
सत्ता के खेल भी आपने खेला
अपने स्वार्थ, मोह में
जो जिसके दावेदार, असली हकदार थे
उन्हें नीचा दिखाया
आपने जिसको सिर पर बिठाया
उन्होंने जो भी किया
आपको अब भी समझ में न आया।
माना की आपके बंदर मौन हैं
अपने ही बंदरों का मौन
आपको समझ में न आया,
सच कहूं तो गाँधी बाबा
आप सिर्फ़ राष्ट्रपिता कहलाते रहे
पर पिता धर्म की आड़ में
दोहरा तिहरा मापदंड अपनाते रहे
अपने नाम के सहारे
हमें भेड़ बकरी की तरह हाँकते रहे।
नाथूराम के कृत्यों का
हम सब विरोध करते हैं,
पर आपका भी समर्थन आज
भला कितने लोग करते हैं?
जिनकी खातिर आप
भावनाओं में बहते रहे,
उनकी आज की पीढ़ियां
आपको कितना मान दे रही हैं
ये बताने की जरुरत कहाँ है?
आज हम आपको नमन करते हैं
बारंबार प्रणाम करते हैं,
अपने मानव मूल्यों की खातिर ही सही
आज भी आपको याद करते हैं
आपको नहीं राष्टृपिता को
अपनी श्रद्धांजलि देते हैं।
हे राम..हे राम..हे राम…
गाँधी तुम्हें प्रणाम
नतमस्तक होकर प्रणाम।

सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उ.प्र.
8115285921
©मौलिक, स्वरचित


Related Posts

ई-कचरा

February 7, 2022

ई-कचरा! कंप्यूटर और उससे संबंधित अन्य उपकरण,टीवी, वाशिंग मशीन, मोबाइल फोन से जुड़े उत्पादन,उपयोग से बाहर होने पर कहते हैं

हां ये तपिश हैं

February 7, 2022

हां ये तपिश हैं ठंडे न होंगे ये सिने जिसमे हैं दहकलाखों में न सही हजारों में हीललकार हैं प्रतिकार

मेरे किस्से -सतीश सम्यक

February 7, 2022

मेरे किस्से- सतीश सम्यक तुम्हें पता थाकिमैं तुम्हें पसंद करता हूँ।तभी तो तुम ,मुझे जलाने की खातिरनाम लिया करती थी

बेरोजगार हूं-दीप मदिरा

February 7, 2022

बेरोजगार हूं कभी कट्टर हिंदूवादी हूं कभी कट्टर भाजपा समर्थक हूं कभी कट्टर मोदी समर्थक हूं कभी कट्टर योगी समर्थक

जाति -पाति- -सिद्धार्थ गोरखपुरी

February 6, 2022

जाति -पाति जाति-पाति में मत उलझो ,रहना है हमें हर ठाँव बराबर।सिर के ऊपर सूरज तपता ,तो पाँव केनीचे छाँव

नब्ज/नेता- सधीर श्रीवास्तव

February 6, 2022

नब्ज/नेता मैं नेता हूं मगर मैं दूसरे किस्म का नेता हूंगली गली नहीं भटकताजनता की नब्ज नहीं टटोलता,क्योंकि मुझे खुद

Leave a Comment