Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Mamta_kushwaha, poem

गले लगाना चाहती/ gale lagana chahti

 गले लगाना चाहती गले लगाना चाहती हूँ तुझे अबना चाहिए अब और कुछ, बस तुझमें समा जाना चाहती हूँएक कदम …


 गले लगाना चाहती

गले लगाना चाहती/ gale lagana chahti

गले लगाना चाहती हूँ तुझे अब
ना चाहिए अब और कुछ,

बस तुझमें समा जाना चाहती हूँ
एक कदम बढ़ा लिया हमने आज,

बस अगला कदम तेरा है
जिसका इंतजार हमे बेसब्री से है,

हर नाकाब उतार फेकना चाहती हूँ
ऐ मौत तुझे गले लगना चाहती हूँ,

थक गए हैं हम इन फरेबी दूनिया से
जहाँ ना कोई अपना है अब,

करो कुछ नया करामात तुम
कि हो जाए तमन्ना हमारी पूर्ण,

गले लगाना चाहती हूँ तुझे अब
ना चाहिए अब और कुछ ।

About author

स्वरचित रचना
ममता कुशवाहा
मुजफ्फरपुर, बिहार


Related Posts

संक्रांति -डॉ. माध्वी बोरसे

January 16, 2022

संक्रांति ! चलो हम सब मिलकर बनाते हैं मकर संक्रांति, सर्दियों में आलस्य में जकड़ा, शरीर पकड़े थोड़ी सी गति,भागदौड़,

सर्दी का मौसम-डॉ. माध्वी बोरसे

January 16, 2022

सर्दी का मौसम! दिसंबर के महीने से पड़ती, सबसे ठंडी रितु सर्दी,जैकेट, ऊनी कपड़े पहनते सब,ओले, तेज हवा और पड़ती

लोहड़ी का पर्व- डॉ. माध्वी बोरसे

January 16, 2022

लोहड़ी का पर्व! फसल की कटाई और बुआई के तौर पर मनाया जाता है यह त्योहार,सब नए नए वस्त्र पहनकर,

इश्क की इंतहा-जयश्री बिरमी

January 16, 2022

इश्क की इंतहा प्यार हो ही जाता हैं गर हो जुत्सजूजब इश्क हो ही जाता हैं रूबरूजब हो जानिब वफा–ए–यारक्यों

आखिर क्यों पढ़े-लिखे बच्चे गलत मार्ग पर जा रहे हैं ?

January 16, 2022

 आखिर क्यों पढ़े-लिखे बच्चे गलत मार्ग पर जा रहे हैं ? हाल ही में आपने सुना होगा सोशल मीडिया पर

दिल में जो है छुपी, बात हो जाने दो

January 16, 2022

दिल में जो है छुपी, बात हो जाने दो दिल में जो है छुपी, बात हो जाने दो,दिन ढले तो

Leave a Comment