Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Siddharth_Gorakhpuri

गर मुश्किलों में रखकर तूँ कोई हल निकाले

गर मुश्किलों में रखकर तूँ कोई हल निकाले गर मुश्किलों में रखकर तूँ कोई हल निकालेजो टूट मैं गया तो …


गर मुश्किलों में रखकर तूँ कोई हल निकाले

गर मुश्किलों में रखकर तूँ कोई हल निकाले
जो टूट मैं गया तो रखना थोड़ा सम्भाले

आंसुओं की बारिश हो रही मुसलसल
सैलाब आ रहा है अब तो मुझे बचा ले

मैं तेरा हूँ! ये हरदम कहता था तूँ मुझी से
तो.. ले मैं कर रहा हूँ खुदको तेरे हवाले

रौशनी मैं दे रहा था ढलते ही शाम जिनको
वो दे रहें हैं दिन में अक्सर मुझे उजाले

औरों की बात तुमसे कहना नहीं मुनासिब
अब जिसकी जितनी मर्जी उतना मुझे सता ले

तेरे वायदे का क्या है जो तुमने कर दिया था
क्या वायदी लफ्जों को जेहन से हम हटा लें

About author

-सिद्धार्थ गोरखपुरी

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

Sundar bachpan Raunak Agrawal

February 17, 2022

सुंदर बचपन !! सोनी सी मुस्कान है वो, हर माँ की जान है वो !!ये बच्चे मन के सच्चे,थोड़े कच्चे

Maa- Archana chauhan

February 16, 2022

माँ इंसान नहीं अब सामानों की ,फिक्र बस रह गई तू ही बता ए जिंदगी , तू इतनी सस्ती कैसे

सम्मान-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 14, 2022

सम्मान! एक वक्त की थी यह बात,खरगोश ने कछुए का उड़ाया मजाक, कितना धीमे चलते हो तुम,कछुए को आया गुस्सा

लालची लोमड़ी-डॉ. माध्वी बोरसे

February 14, 2022

लालची लोमड़ी! भरी दोपहर में एक दिन लोमड़ी भटके,कर रही थी भोजन की तलाश,दिखे उसे बेल में अंगूर लटके,किया उसे

बुर्का, हिजाब और घुंघट सब गुलामी की निशानी

February 14, 2022

 बुर्का, हिजाब और घुंघट सब गुलामी की निशानी जब से मानव समाज की शुरुआत हुई है तब से लेकर अब

मेरे लेखन का ध्येय- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

मेरे लेखन का ध्येय मुझे पता है कि आजकल मेरा लेखनसरकार में शामिल दलों औरउनके समर्थकों को नहीं भाता हैक्योंकि

Leave a Comment