भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव
क्योंकि ज़लनखोरों को मिर्ची लग रही है
भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव क्योंकि ज़लनखोरों को मिर्ची लग रही है मेरी कामयाबी से चारों और खुशी मच रही है …
Related Posts
ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!!
October 16, 2022
कविता–ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!! चकरे खिलाकर बदुआएं समेटी करके भ्रष्टाचार परिवार सहित सुखी रहोगे जब छोड़ोगे भ्रष्टाचार अब भी
पीत्वा मोहमयीं प्रमादमदिरा मुन्मत्तभूतं जगत् ॥
October 16, 2022
पीत्वा मोहमयीं प्रमादमदिरा मुन्मत्तभूतं जगत् ॥ मुझे फुर्सत नहीं काम एक पैसे का नहीं फुर्सत एक मिनट की नहीं! व्यस्त
भारत को सोने की चिड़िया बनानां हैं
October 16, 2022
कविता–भारत को सोने की चिड़िया बनानां हैं भारत को सोने की चिड़िया बनानां हैंभ्रष्टाचार को रोककर सुशासन को आखरी छोर
वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2022 – भारत का फ़िर पिछड़ना चिंताजनक, संदेहजनक
October 16, 2022
वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2022 – भारत का फ़िर पिछड़ना चिंताजनक, संदेहजनक भारत को वैश्विक मंचों पर भुखमरी मिटाने संबंधी चलाई
आओ खाद्य नायक बने – किसी को पीछे ना छोड़े
October 16, 2022
सभी के लिए भोजन आओ खाद्य नायक बने – किसी को पीछे ना छोड़े अंतरराष्ट्रीय स्तरपर भूख के खिलाफ़ एकजुट
महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है
October 16, 2022
आओ ग्रामीण महिलाओं को सशक्त करने हाथ बढ़ाएं महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है ग्रामीण महिलाओं के उत्थान हेतु उनका
