Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, vyang

क्योंकि ज़लनखोरों को मिर्ची लग रही है

 भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव  क्योंकि ज़लनखोरों को मिर्ची लग रही है मेरी कामयाबी से चारों और खुशी मच रही है  …


 भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव 

क्योंकि ज़लनखोरों को मिर्ची लग रही है

मेरी कामयाबी से चारों और खुशी मच रही है 
मेरे ऊपर सरस्वती के ज्ञान की बारिश हो रही है 
इसीलिए प्रतिद्वंदियोंद्वारा खिचड़ी पकाई जारही है 
क्योंकि ज़लनखोरों को मिर्ची लग रही है 
राजनीति की सफलताओं पर बांछें खिल रही है 
एक के बाद एक सब चुनाव जीत रहे हैं 
आरोपों-प्रत्यारोपों की झड़ी लग रही है 
क्योंकि ज़लनखोरों को मिर्ची लग रही है
व्यापारिक क्षेत्र में नंबरवन की स्थिति रही है 
तरक्की जोरदार ढंग से हो रही है 
टांग खींचने की होड़ लग रही है 
क्योंकि ज़लनखोरों को मिर्ची लग रही है 
सर्विस सेक्टर में सफ़लता के झंडे गाड़ रहे हैं 
नए-नए इनोवेशन कर रहे हैं 
लोग नुक्ताचीनी निकालकर हतोत्साहित कर रहे हैं 
क्योंकि ज़लनखोरों को मिर्ची लग रही है
परिवार में जबरदस्त एकताहै सफ़लता पा रहे हैं 
सब मिलकर कार्य को अंजाम दे रहे हैं 
पटखनी देकर लोग हमारा परिवार तोड़ रहे हैं 
क्योंकि ज़लनखोरों को मिर्ची लग रही है

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 


Related Posts

व्यंग्य कविता-मेरे पास टाइम नहीं| I mere pas time nahi

November 13, 2022

व्यंग्य कविता-मेरे पास टाइम नहीं मेरे पास पचासों काम रहते है तुम्हारे समान खाली हूं क्या मैं बहुत बिजी रहता

आओ देखें कोई भी मतदाता पीछे न छूटे|koi bhi matdata na chhute

November 13, 2022

मतदाता आओ देखें कोई भी मतदाता पीछे न छूटे मतपत्र के जबरदस्त बल के माध्यम से ताकत निर्बाध रूप से

नो मनी फॉर टेरर| No money for terror

November 13, 2022

नो मनी फॉर टेरर| No money for terror  आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने वैश्विक सम्मेलन 18 -19 नवंबर 2022 आतंकवाद

माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा के तुल्य ब्रह्मांड में कोई सेवा नहीं

November 13, 2022

किसी ने रोज़ा रखा किसी ने उपवास- कबूल उसका हुआ जिसने मां-बाप को रखा अपने पास माता-पिता और बुजुर्गों की

व्यंग्य कविता-किसी को बताना मत|kisi ko batana mat

November 13, 2022

व्यंग्य कविता-किसी को बताना मत बड़े बुजुर्गों की कहावत सच है कि हाथी के दांत दिखाने खाने के और हैं

गरीबी पर भेदभाव क्यों ?|Why discrimination on poverty?

November 10, 2022

गरीबी पर भेदभाव क्यों ?|Why discrimination on poverty? सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े समाज की श्रेणी में गरीब सवर्णों

PreviousNext

Leave a Comment