Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Siddharth_Gorakhpuri

कविता -शहर चलाता है

रिक्शा, ऑटोरिक्शा, इलेट्रिक रिक्शा चलाने वाले भाईयों को समर्पित रचना कविता -शहर चलाता है जो बिना थके सारा शहर चलाता …


रिक्शा, ऑटोरिक्शा, इलेट्रिक रिक्शा चलाने वाले भाईयों को समर्पित रचना

कविता -शहर चलाता है

जो बिना थके सारा शहर चलाता है
वो बड़ी मुश्किल से खुद का घर चलाता है

अधूरी नींद अधूरा सपना
दिन दोपहरी में भी तपना
रोजी के चक्कर में प्रतिदिन
सवारी रूपी ईश्वर को तकना
क्या खूब चारो ओर नजर चलाता है
जो बिना थके सारा शहर चलाता है
वो बड़ी मुश्किल से खुद का घर चलाता है

जिसने साथ निभाया ज्यादा
मंजिल तक पहुंचाया ज्यादा
पर समय को जेहन में रख न सके
लोगो को लगा किराया ज्यादा
वो तीपहिया भी काफ़ी थक कर चलाता है
जो बिना थके सारा शहर चलाता है
वो बड़ी मुश्किल से खुद का घर चलाता है

सड़कों पर आधी उम्र कटी
कितनों की तो ताउम्र कटी
कभी सही सलामत घर आए
कभी दुर्घटना बहुत बड़ी घटी
अपना घर वो कई बार मर कर चलाता है
जो बिना थके सारा शहर चलाता है
वो बड़ी मुश्किल से खुद का घर चलाता है

About author

-सिद्धार्थ गोरखपुरी

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

Har vade par asha kiya na kro

February 8, 2021

 ग़ज़ल हर   वादे   पर   आशा   किया   ना   करो पराधीन    होकर     जिया      ना     करो लगी है

Peele Peele phoolon me ab jakar gungunana hai

February 8, 2021

 ग़ज़ल पीले पीले फूलों में अब जाकर गुनगुनाना हैरोने वाले को हंसाना है सोने वाले को जगाना है समय के

Zindagi me mere aana tera

February 6, 2021

 ग़ज़ल  ज़िन्दगी में मेरे आना तेरा प्यार हर पल मेरा, निभाना तेरा भूल जाऊं मैं कैसे तुझको सनम प्यार गंगा

Ishq me ankho se ashq ka behna jaruri

January 4, 2021

 Ishq me ankho se ashq ka behna jaruri यह गीत  ,कवि C. P. गौतम द्वारा रचित है , कवि C.

Bhatakte naav ka kinara ho tum – kavya

January 4, 2021

Bhatakte naav ka kinara ho tum – kavya यह काव्य ,कवि C. P. गौतम द्वारा रचित है , कवि C.

Beete lamho me jeena, zahar jaise peena

November 20, 2020

गीत तुम जहाँ भी रहोग़म का साया न होप्यार तुमको मिलेदर्द आया न होइस दीवानें की खुशियाँतुम्हें ही मिलेमाफ करना

Leave a Comment