Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Siddharth_Gorakhpuri

कविता -रश्क- सिद्धार्थ गोरखपुरी

कविता -रश्क रश्क अंतस में पाले हुए हो हजारोंचैन की अहमियत बस तुम्हें ही पता हैबेचैनी भरा दिन कैसे है …


कविता -रश्क

कविता -रश्क- सिद्धार्थ गोरखपुरी

रश्क अंतस में पाले हुए हो हजारों
चैन की अहमियत बस तुम्हें ही पता है
बेचैनी भरा दिन कैसे है कटता?
तुम्हारी रातों की नींदे कहाँ लापता है
आफरीन चेहरा निगाहें शराबी
पर बेचैनियाँ हैं अंतस में काफी
सभी जानते हैं तुम्हारे मन की रंजिश
अब तो सुधार लो अपने अंतर्मन की झांकी
सब सोच से ही बदलता है जग में
सोच लो के ये बस सोच की ही खता हैं
रश्क अंतस में पाले हुए हो हजारों
चैन की अहमियत बस तुम्हें ही पता है
चाहते हैं तुम्हें सब! ये तुम्हारा भरम है
मुँह पे बड़ाई करना बहुतों का धरम है
तारीफ सुन के बस फुले जा रहे हो
तारीफ के पुलों के सारे खम्भे वहम हैं
गिर जाते हो पर सम्भलते नहीं हो
ये वाकया होता तो कई मरतबा है
रश्क अंतस में पाले हुए हो हजारों
चैन की अहमियत बस तुम्हें ही पता है
खुद को जलाने का क्या फायदा है
जीवन का ये बस बुरा कायदा है
रश्क को गर अंतस में अब भी पनाह दोगे
तो इक दिन गिरोगे मेरा वायदा है
कहना मानों और अंतर्मन से सम्भलो
मैंने ये बात कही तुमसे कितनी दफ़ा है
रश्क अंतस में पाले हुए हो हजारों
चैन की अहमियत बस तुम्हें ही पता है

-सिद्धार्थ गोरखपुरी
रश्क- ईर्ष्या
अंतस -ह्रदय
आफरीन -मनोहर
रंजिश -दुश्मनी


Related Posts

दोस्तों के नाम की शाम-सुधीर श्रीवास्तव

February 6, 2022

दोस्तों के नाम की शाम आइए!कुछ करते नहीं तो बस इतना करते हैं,एक शाम दोस्तों के नाम करते हैं,मौज मस्ती

सतत विकास-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 4, 2022

सतत विकास! करें गरीबी का निवारण, मिलकर बचाए पर्यावरण,हो समाज मैं आत्मनिर्भरता,बिना फर्क किए हो लैंगिक समानता! कोई व्यक्ति न

खुद को परख-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 4, 2022

खुद को परख! करके दिखा तू सोच मत, इतनी सी बात तू दिल में रख,जज्बा हो तुझ में जबरदस्त,खुद को

काश!!! बचपन के वह दिन लौट आएं

February 4, 2022

कविताकाश!!! बचपन के वह दिन लौट आएं बचपन के दिन कितने सुहाने थे काश कभी ऐसा करिश्मा भी हो जाए

बजट-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 4, 2022

बजट! अगले वित्त वर्ष के लिए सरकार की वित्तीय योजना,इसके जरिए यह है सरकार को सोचना,अपने राज्य की तुलना में,सरकार

माता-पिता-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 4, 2022

माता-पिता मेरे आदरणीय, प्यारे माता-पिताआपका प्रेम, मेरी जिंदगी है,आप दोनों ही, मेरी बंदगी है! आप ही मेरे माता-पिता हो, हर

Leave a Comment