Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Siddharth_Gorakhpuri

कविता – उलझ जाता हूँ मैं

कविता – उलझ जाता हूँ मैं किसी से बात कहनी होकिसी की बात सुननी होमानवता और मुझमें सेअगर मेरी जात …


कविता – उलझ जाता हूँ मैं

किसी से बात कहनी हो
किसी की बात सुननी हो
मानवता और मुझमें से
अगर मेरी जात चुननी हो
कुछ समझ नहीं आता,बस उलझ जाता हूँ मैं

किसी से इजहार करना
किसी से प्यार करना हो
इस मतलबी दुनियाँ में
किसी पर ऐतबार करना हो
कुछ समझ नहीं आता, बस उलझ जाता हूँ मैं

वायदे याद रखने हों
कायदे याद रखने हों
कुछ करने से पहले
फायदे याद रखने हों
कुछ समझ नहीं आता, बस उलझ जाता हूँ मैं

किसी को अपना बनाना हो
किसी से मिलने जाना हो
वैसे सोचता भी हूँ
इन सब का क्या बहाना हो
कुछ समझ नहीं आता बस उलझ जाता हूँ मैं

About author

-सिद्धार्थ गोरखपुरी

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

बसंत की बहार- डॉ इंदु कुमारी

February 14, 2022

बसंत की बहार बसंत तेरे आगमन सेप्रकृति सजी दुल्हन सीनीलगगन नीलांबरजैसे श्याम वर्ण कान्हावस्त्र पहने हो पितांबरपीले रंगों में सरसों

माँ- डॉ. इन्दु कुमारी

February 14, 2022

माँ मां देती आंचल की छायाप्रेम की मूरत सी सुंदर कायाअगाध प्रेम की द्योतक रही वात्सल्य ह्रदय शोभनीय रही रब

यादें-जयश्री बिरमी

February 14, 2022

यादें जब आई न नींद खूब उधेड़े ताने बानेकुछ दिन ही नहीं कुछ महिनें ही नहींसालो तक पहुंचाईबचपन से हुई

आज फिर बसंत आई हैं-जयश्री बिरमी

February 14, 2022

आज फिर बसंत आई हैं पतझड़ की छोड़ चुन्नरआज बसंत ने फिर ली अंगड़ाई हैंहैं बरखा ऋतुओं की रानीबसंत भी

सांप्रदायिक सद्भाव, सौद्रह्यता भारत की खूबसूरती

February 14, 2022

सांप्रदायिक सद्भाव, सौद्रह्यता भारत की खूबसूरती सामाजिक सद्भाव, सौद्रह्यता, समरसता, मानवतावादी दृष्टि की सोच में युवाओं की ऊर्जा का सदुपयोग

जब वह चुप है- डॉ. माध्वी बोरसे!

February 14, 2022

जब वह चुप है! जब वह चुप है इंसान,क्यों कर रहा तू हर जगह बखान,निंदा करना सबसे बड़ा पाप,हर गलती

Leave a Comment