Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

कविता -आँखें भी बोलती हैं

 कविता -आँखें भी बोलती हैं सिद्धार्थ गोरखपुरी न जीभ है न कंठ है कहने का न कोई अंत है दिखने …


 कविता -आँखें भी बोलती हैं

सिद्धार्थ गोरखपुरी
सिद्धार्थ गोरखपुरी

न जीभ है न कंठ है

कहने का न कोई अंत है

दिखने में महज ये बात है

पर मामला थोड़ा ज्वलंत है

आँखें भावनाओं के इर्द -गिर्द

जब भी अक्सर डोलतीं हैं 

ये आँखें भी बोलती हैं

दुःख हो या संताप हो

अकेलेपन का विलाप हो

भावनाओं से होकर ओतप्रोत

रूँधे गले से अलाप हो

आदमी के हर जज़्बात को

फिर धीरे -धीरे खंगालतीं हैं 

ये आँखें भी बोलती हैं

ख़ुशी के आंसू एक जैसे

दुःख के आंसू एक जैसे

भाव को समझ पाया है

कमतर

आदमी बस जैसे तैसे

शायद अगले आदमी के

भाव को टटोलतीं हैं

ये आँखें भी बोलती हैं

मन में अगर लगाव हो

थोड़ा अधिक तनाव हो

मां का गले से लग जाना 

ममतामयी कोई भाव हो

मन के कुंठित हर गिरह को

आहिस्ते से खोलतीं हैं

ये आँखें भी बोलती हैं

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

स्थानीय भाषाओं में नवाचार कार्यक्रम चलाया है

March 5, 2023

भावनानी के भाव  स्थानीय भाषाओं में नवाचार कार्यक्रम चलाया है नवाचार में तीव्र विकास करने समृद्ध करने भाषाई अड़चनों को

हे राम!! | Hey ram

March 5, 2023

हे राम!! राम तुम क्यूं ना बन सके प्रैक्टिकल,कि जब मेघनाद का तीर लगा लखन को,क्यों तुमने द्रवित किया था

द्वारिका में बस जाओ

March 5, 2023

 द्वारिका में बस जाओ वृंदावन में मत भटको राधा, बंसी सुनने तुम आ जाओ । कान्हा पर ना इल्जाम लगे,

सब्र। सब्र पर कविता| kavita -sabra

March 5, 2023

 सब्र। जब आंखें नम हो जाती है, जब आत्मा सहम जाती है, उम्मीद जिंदा नहीं रहती, जिंदगी गम से भर

मेरी दादी माँ| meri dadi maa

March 5, 2023

 मेरी दादी माँ आज की शाम मेरी दादी के नाम कर रहे सब आज तुम्हारी बातें इकट्ठा हो घर के

नम्रता का आभूषण धारण करना होगा

March 4, 2023

 भावनानी के भाव नम्रता का आभूषण धारण करना होगा अपना जीवन सुखी बनाना है तो  अटके काम बनाना है तो 

PreviousNext

Leave a Comment