Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhaskar datta, poem

कविता -अभिव्यक्ति का अंतस्

अभिव्यक्ति का अंतस् आहूत हो रही हैभाव की अंगडा़ईमन की खामोश और गुमसुम परछाई मेंकि कहीं कोई चेहरा… चेहरे की …


अभिव्यक्ति का अंतस्

आहूत हो रही है
भाव की अंगडा़ई
मन की खामोश और गुमसुम परछाई में
कि कहीं कोई चेहरा…
चेहरे की रंगत
कविताओं में हिलकोरे लेती
मुझमें ही डूबती जा रही है
बड़ी आंत से छोटी आंत में
कुंडली के ऊपर फन पटककर…
पर क्या आप विश्वास करेंगे?
कतई नहीं…
क्योंकि मैं मनुष्यों की झोली में
बंदरों और बंदरगाहों का खज़ाना हूँ,
जिसमें दिल भी है और दिल्ली भी….
मगर नजरें हैं कि टिकती ही नहीं..

About author

भास्कर दत्त शुक्ल  बीएचयू, वाराणसी
भास्कर दत्त शुक्ल
 बीएचयू, वाराणसी

Related Posts

poem- phul sa jis ko mai samjha

November 15, 2020

 poem- phul sa jis ko mai samjha    तुमको चाहा तुमको पायातुमको मैंने खो दियाजब भी तेरी याद आईसीपी शायर

Aye dil aao tumhe marham lga du

July 16, 2020

दोस्तों आज हम आपके लिए लाए है एक खूबसूरत रचना Aye dil aao tumhe marham lga du. तो पढिए और आनंद

Previous

Leave a Comment