Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Gurudeen Verma, poem

ऐसे हम नववर्ष का,आओ सत्कार करें

ऐसे हम नववर्ष का,आओ सत्कार करें ऐसे हम नववर्ष का, आवो सत्कार करें।द्वेष, नफरत मन से मिटाकर, सबका उद्धार करें।।ऐसे …


ऐसे हम नववर्ष का,आओ सत्कार करें

ऐसे हम नववर्ष का, आवो सत्कार करें।
द्वेष, नफरत मन से मिटाकर, सबका उद्धार करें।।
ऐसे हम नववर्ष का—————–।।

नई सुबह पर जीवन की, नई ऐसे शुरुआत करें।
माने सबको अपना साथी, हंसकर सबसे मुलाकात करें।।
फ़िजा लगे महकी महकी,खुशबू फैली हो हरतरफ ।
हर चेहरा गुलजार लगे, गुलशन में ऐसी बहार भरे ।।
ऐसे हम नववर्ष का ————————।।

लालिमा नये सूरज की , नई ऊर्जा हर दिल में भरें।
आंखों में तेजस नया हो, शुभ शब्दों से लब हो भरें।।
सरस सलिल हो हर मन, नववर्ष की नव सुबह में ।
चंद्रमा सा शीतल हो हृदय, पाप-क्रोध अलविदा करें।।
ऐसे हम नववर्ष का ————————।।

प्रगति और समृद्धि हो , हर मानव की भारत में ।
जाति – धर्म के बलवे नहीं हो, नई सदी के भारत में।।
जज्बा भरें देशभक्ति का , हर मन में नववर्ष पर ।
अपना वतन हो उन्नत, खुशहाल, ऐसा आज प्रण करें ।।
ऐसे हम नववर्ष का ————————।।

About author 

Gurudeen verma
शिक्षक एवं साहित्यकार-

गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)


Related Posts

Khwabo ka jahan by Jitendra kabir

July 19, 2021

 ख्वाबों का जहां इस जहां से परे न जाने कितने जहां बसते हैं, हर शख्स यहां अपने ख्वाबों का जहां

Corona /vigyan by R.S. meena

July 19, 2021

कोरोना/विज्ञान जो कुछ भी हो,इक दिन कोरोना चला जायेगा । हम सबको इंसानियत का सबक सिखा जायेगा ।। ना आये

Laghukatha Bado ki dant bhi ashirvad by kishan bhavnani gondiya

July 19, 2021

लघुकथाबड़ो की डांट भी आशीर्वाद रोज की दिनचर्या की मुताबिक़ दादाजी बेसब्री से अखबार वाले का इंतजार कर रहे थे।उन्हें

musibat jab bhi aati hai by gaytri shukla

July 18, 2021

मुसीबत जब भी आती है मुसीबत जब भी आती हैबहुत कुछ कह के जाती है । रात कितनी अंधेरी होसमय

kavya Purvagrah by sudhir Srivastava

July 18, 2021

 पूर्वाग्रह हमने समझा जिसे साधू वो तो शैतान निकला, दुत्कारा था जिसे उस दिन बहुत इंसानरुपी वो तो भगवान निकला।

kavita balatkar written by rajesh

July 18, 2021

बलात्कार ज्येठ महीने की थी बात , भीषण गर्मी की थी रात।स्कूल हमारे बंद हुए थे,थक के हम भी चूर

Leave a Comment