Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Anita_sharma, poem

आशा- अनिता शर्मा

आशा उसने मुझे मुस्कुरा कर देखा,कौन हो तुम?हौले से पूछा।उसने आंखो में चमक भर कहा,मैं तो हूँ,तुम्हारी ही आशा ।एक …


आशा

आशा- अनिता शर्मा

उसने मुझे मुस्कुरा कर देखा,
कौन हो तुम?हौले से पूछा।
उसने आंखो में चमक भर कहा,
मैं तो हूँ,तुम्हारी ही आशा ।
एक विश्वास सहज ही आया,
आत्म सम्मान सहज ही छाया।
आशान्वित हो उठी तत्क्षण,
नव-जागृति मनोबल बढ़ाया।
मैने उस आशा को अपनाया,
जीवन में अवसर को पाया।
समय का सदुपयोग किया तब,
सकारात्मक ऊर्जा से भरा मन।
आशान्वित क्षण नव उत्साहित,
आभासित दीपक की ज्योति।
सहचर आशा की किरण भर,
अग्रसर हो जीवन की ओर ।

अनिता शर्मा
 झाँसी


Related Posts

पारदर्शी जीवन!

June 24, 2022

पारदर्शी जीवन! डॉ. माध्वी बोरसे! चलो सोचे और बोले एक समान, जिंदगी को बना ले, थोड़ा और आसान,दिल से और

प्रसन्न मन!

June 24, 2022

प्रसन्न मन! डॉ. माध्वी बोरसे! जब मन होता है प्रसन्न,रोकने को चाहता है वह क्षण,चलता वक्त थम जाए,कई और हम

कर्म से लिखे आत्मकथा!

June 24, 2022

कर्म से लिखे आत्मकथा! माध्वी बोरसे! लिखें हमारे जीवन की कहानी,साहस,दृढ़ता हो इसकी निशानी,कलम से नहीं कर्म से लिखें,हमारा जीवनी

खान-पान पर भी तकरार

June 24, 2022

 खान-पान पर भी तकरार जितेन्द्र ‘कबीर’ एक घर की चार संतानें… खान-पान में चारों के हैं अलग विचार, शाकाहारी है

चुनाव के पहले और बाद में

June 24, 2022

 चुनाव के पहले और बाद में जितेन्द्र ‘कबीर’ जनता के सामने विनम्र याचक मुद्रा में नेता लोकतंत्र के पर्व की 

विज्ञापन-मय भारत

June 24, 2022

 विज्ञापन-मय भारत जितेन्द्र ‘कबीर’ सरकारी अस्पतालों में पर्ची बनाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने एवं छत्तीस प्रकार के टेस्ट करवाने

PreviousNext

Leave a Comment