Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, sudhir_srivastava

अनंत यात्रा

 अनंत यात्रा सुधीर श्रीवास्तव शून्य से शिखर तक जीवन की गतिमान यात्रा खुद को श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर होने का दंभ …


 अनंत यात्रा

सुधीर श्रीवास्तव
सुधीर श्रीवास्तव

शून्य से शिखर तक

जीवन की गतिमान यात्रा

खुद को श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर होने का दंभ

आम से खास तक

पापी से सन्यासी तक।

रूला, लंगड़ा, अपाहिज, कोढ़ी

या नर्क से बद्तर जीवन स्वामियों तक

सुख सुविधा के अनंत भोगियों तक

धन पिपासुओं से धन याचक तक।

हर जीव, जंतु, पशु पक्षी, पेड़ पौधे

जल,जल या नभचर तक

हर किसी की जीवन यात्रा

जो किसी भी रुप में शुरू हुई है।

उसका समापन अनंत की यात्रा से

पुनः नव जीवन यात्रा के लिए,

परंतु हम आप यही तो सोच नहीं पाते

खुद को खुदा का पर्याय मान बैठते

और फिर एक दिन खाली हाथ

अपना अपना रटते रटते।

निकल पड़ते मोह माया की फ़िक्र 

हाथ से फिसल जाती,

सिर्फ यह जाता एक शून्य

जो शरीर को मिट्टी हम 

छोड़ देता इस जहां में

और निकल पड़ता अपनी अनंत यात्रा पर

स्वतंत्र हो जाता भव बंधनों से

यथार्थ बोध कराता आगे बढ़ जाता। 

सुधीर श्रीवास्तव

गोण्डा उत्तर प्रदेश

८११५२८५९२१

© मौलिक, स्वरचित

०१.०५.२०२२


Related Posts

कविता मैं बहुत खुश था

February 24, 2022

कवितामैं बहुत खुश था मैं बहुत ख़ुश था जब मेरे माता-पिता बहन हयात थे मुझे कोई फ़िक्र जिम्मेदारी चिंता नहीं

Sundar bachpan Raunak Agrawal

February 17, 2022

सुंदर बचपन !! सोनी सी मुस्कान है वो, हर माँ की जान है वो !!ये बच्चे मन के सच्चे,थोड़े कच्चे

Maa- Archana chauhan

February 16, 2022

माँ इंसान नहीं अब सामानों की ,फिक्र बस रह गई तू ही बता ए जिंदगी , तू इतनी सस्ती कैसे

सम्मान-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 14, 2022

सम्मान! एक वक्त की थी यह बात,खरगोश ने कछुए का उड़ाया मजाक, कितना धीमे चलते हो तुम,कछुए को आया गुस्सा

लालची लोमड़ी-डॉ. माध्वी बोरसे

February 14, 2022

लालची लोमड़ी! भरी दोपहर में एक दिन लोमड़ी भटके,कर रही थी भोजन की तलाश,दिखे उसे बेल में अंगूर लटके,किया उसे

बुर्का, हिजाब और घुंघट सब गुलामी की निशानी

February 14, 2022

 बुर्का, हिजाब और घुंघट सब गुलामी की निशानी जब से मानव समाज की शुरुआत हुई है तब से लेकर अब

Leave a Comment