Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Anita_sharma, poem

अंजान राहें!- अनिता शर्मा

अंजान राहें!! है अंजान राहें थमती नहींनित नये रास्ते मिलते ही जायें।जीवन डगर पर मुस्कान बिखेरीबढ़ते चले हैं बाधाओं से …


अंजान राहें!!

अंजान राहें!-  अनिता शर्मा

है अंजान राहें थमती नहीं
नित नये रास्ते मिलते ही जायें।
जीवन डगर पर मुस्कान बिखेरी
बढ़ते चले हैं बाधाओं से टकराकर।
नित नये मुकाम हासिल हुए
अनुभव बहुत जीवन से जुड़े हैं।
अंजान राहें थमती छण भर
हमारी कोशिश पहचान गढ़ रही है।
अंजान राह अब जान पहचान हो गयी है।
जीवन के अंजान सफर में
हर पल उम्र में बढ़ रहे हैं।
कर्म योगी से अंजान राह पर
निर्विकार निर्भय बढ़ रहे हैं।।

अनिता शर्मा झाँसी
मौलिक रचना


Related Posts

पश्चाताप की अग्नि सुधीर श्रीवास्तव-

December 15, 2021

पश्चाताप की अग्नि स्तब्ध रह गया धरा गगन मौन हो गये जन के बोल, निष्ठुर ईश्वर तूने खेलाक्यों ऐसा अनचाहा

वीर जवान- डॉ इंदु कुमारी

December 15, 2021

वीर जवान धरती ने उपजाई हैफसलें अब तक जितने सबसे ऊपर है जिसमेंकहते हैं वो है कोहनूर अनमोल रत्नों में

सफलता के मंत्र – चन्दा नीता रावत

December 15, 2021

।। सफलता के मंत्र ।। सफलता के मंत्रो को हमेगुनगुनाना है राहों के काटों से हँस कर गुजरजाना है संकल्प

ऐ नदी ऐ नदी- चन्दा नीता रावत

December 15, 2021

ऐ नदी ऐ नदी ऐ नदी ऐ नदीकल कल करती बहती है किनारो पर तुम्हारे जिन्दगी बसा करती हैविशाल रूप

प्रकृति की गोदी- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 15, 2021

प्रकृति की गोदी ध्यान साधना वरदान प्रकृति की,हम शोध खोज न कर पाते हैं ,पूर्ण प्रकृति हमारी ध्यान मग्न है

एक समय था – अनीता शर्मा

December 15, 2021

एक समय था एक समय था–जब साथ सभी रहते थे। चाचा चाचाजी और बच्चे–ताऊ ताई और बच्चे। कितना बड़ा परिवार

Leave a Comment