Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Ashish Tiwari, poem

हे नववर्ष!-आशीष तिवारी निर्मल

हे नववर्ष! तुम भी दगा न करना आओ हे नववर्ष!तुम हमसे कोई दग़ा न करना बीते जैसे साल पुराने वैसी …


हे नववर्ष!
तुम भी दगा न करना

हे नववर्ष!-आशीष तिवारी निर्मल
आओ हे नववर्ष!तुम हमसे कोई दग़ा न करना
बीते जैसे साल पुराने वैसी कोई ख़ता न करना।

पहले के ज़ख्म़ों से ही चाक शहर का सीना है
नये साल में दर्द मिलें किसी को ख़ुदा न करना।

मेरी इल्तज़ा तुझसे बस इतनी है हे नववर्ष
अपनों को यूँ अपनो से तुम ज़ुदा न करना।

संकट के इस दौर में तू पूरे मन से पूजा जाएगा
फरिश्ता साबित होगा , किसी का बुरा न करना।

संकट से जूझ रहे हैं सब,विषाद से गहरा नाता है
ऐसे में आकर के शेष जीवन बे-मज़ा न करना।

सबका हो सुनहरा आने वाला हर एक पल
किसी के लिए कोई भी बुरी बद्दुआ न करना ।

आशीष तिवारी निर्मल
मकान नंबर 702 लालगाँव
जिला रीवा ( मध्य प्रदेश)


Related Posts

राष्ट्र की नारी – डॉ इंदु कुमारी

December 16, 2021

राष्ट्र की नारी साधारण -सी हूँ नारी भारत माँ की प्यारीराष्ट्र की राज दुलारीगाँधीजी के पदचिन्होंअहिंसा की हूँ पूजारी रश्मिरथी

दुनियादारी की बात- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 16, 2021

दुनियादारी की बात ज्यादातर मेहनती एवं फुर्तीले लोगपसंद नहीं करते अपने आस-पासआलसी और कामचोर लोगों को,कभी उनको डांट डपट करतो

मीरा भटक रही- डॉ इंदु कुमारी

December 16, 2021

मीरा भटक रही हे नाथ परवर दिगार करवाओ अपनी दीदारभक्तों की सुनो पुकारमीरा भटक रही संसार । मायाजाल क्यों बिछायासब

जो सबसे जरूरी है- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 16, 2021

जो सबसे जरूरी है एक दृश्य अक्सर दिख जाता है मुझे अपने आस-पास… चार कंधों पर अपनी आखिरी यात्रा परनिकले

काटब धान – डॉ इंदु कुमारी

December 16, 2021

काटब धान सखी रे हुलसायल मनमा आयल अगहन महीनमाधान काटी करब पबनियाचूड़ा कुट करब नेमनमा। कुल देवी के चढ़ायब नागुड़

छोड़ दो नफरत करना- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 16, 2021

छोड़ दो नफरत करना सिर्फ इसलिए कि कुछ बाघ नरभक्षी निकल जाते हैं,तो क्या दुनिया से उनका वजूदमिटा दिया जाना

Leave a Comment