Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

cinema, Virendra bahadur

सुपरहिट: केतन मेहता और धीरूबेन की ‘भवनी भवाई’

सुपरहिट: केतन मेहता और धीरूबेन की ‘भवनी भवाई’ इसी 9 मार्च को 96 साल की धीरूबेन की मौत हो गई। …


सुपरहिट: केतन मेहता और धीरूबेन की ‘भवनी भवाई’

सुपरहिट: केतन मेहता और धीरूबेन की 'भवनी भवाई'

इसी 9 मार्च को 96 साल की धीरूबेन की मौत हो गई। केतन मेहता वैसे तो हिंदी फिल्मों (मिर्च मसाला, मि.योगी, (टीवी सीरियल), हीरो हीरालाल, माया मेमसाब, सरदार, मंगल पांडे, रंग रसिया) के लिए जाने जाते हैं। परंतु उनकी पहली फिल्म गुजराती में ‘भवनी भवाई’ थी।
अपने एक इंटरव्यू में मेहता ने कहा था, ‘गुजराती मेरी मातृभाषा है और मेरे पिताजी गुजराती के प्रोफेसर थे। इसलिए उमाशंकर जोशी जैसे अनेक गुजराती साहित्यकारों के सहवास का लाभ मुझे मिला है। मैंने भी बाद में गुजराती साहित्य खूब पढ़ा है। फिल्म संस्था से पास होने के बाद मैंने कुछ दिन अहमदाबाद के इसरो संचालित सेटेलाइट चैनल के लिए काम किया था। इसके लिए मुझे खेड़ा जिला में खूब भटकना पड़ा था। मैं गांव वालों के लिए कार्यक्रम बनाता था, इसलिए मुझे गांव की समस्याओं के बारे में पता चला। खास कर अछूतों की बातें मूझे परेशान करती थीं। उसी बीच मुझे ‘भवनी भवाई’ की कहानी मिली, जो अछूत के वेश के रूप में भवाई में अदा कर रही थी।
बड़ौदा में पैदा हुई, मुंबई में पली-बढ़ी और मुंबई में ही पढ़-लिखकर अध्यापक बनी धीरूबेन को गुजरात के ग्रामीण इलाके में प्रचलित भवाई की लोककला को आधार बनाकर अस्पृश्यता और अंधविश्वास पर ‘भवनी भवाई’ नाटक लिखने का विचार कैसे आया होगा, उनका कोई बयान नहीं मिलता। परंतु इसमें उन्होंने दलित और पिछड़े समाज के जो सवाल उठाए थे, वे ज्वलंत और यथार्थ थे।
इसीलिए केतन मेहता ने इस पर फिल्म बनाई थी, विवेचकों ने इसकी खूब प्रशंसा की थी। इसे राष्ट्रीय पुरस्कारों में राष्ट्रीय एकता के लिए नरगिस दत्त पुरस्कार मिला था। इसे म्युजियम आफ माडर्न आर्ट के फिल्म फेस्टिवल में पसंद किया गया था और थ्री कांटिनेंट्स फेस्टिवल में यूनेस्को क्लब ह्युमन राइट्स का पुरस्कार मिला था।
फिल्म को दिल्ली में आठवें फिल्म महोत्सव में दिखाया गया था। इसके अलावा इसे अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, हालैंड, चेकोस्लोवाकिया और इंग्लैंड में भी खूब वाहवाही मिली थी। ‘भवनी भवाई’ को बाद में ‘अंधेर नगरी’ के नाम से हिंदी में डब किया गया था।
विद्यार्थी चटर्जी नाम के फिल्म विवेचक ने इस फिल्म को देखने के बाद लिखा था, ‘भवनी भवाई’ बनाने के बाद केतन मेहता रिटायर हो गए होते तो भी एक अग्रणी निर्देशक के रूप में वह याद किए जाते, इस तरह की उनकी इस फिल्म में ताकत और प्रतिभा थी।
फिल्म का स्वरूप कहानी के स्वरूप के अनुसार था। हरिजनों का एक ग्रुप शहर में स्थनांतर कर रहा है। उसने एक रातवास के दौरान एक वृद्ध (ओम पुरी) हरिजन राजा चक्रसेन (नासिरुद्दीन शाह) की कहानी कहता है। उसकी दो रानियां हैं। उनमें से छोटी रानी (सुहासिनी मुले) अपने प्रेमी और मंत्री (बेंजामिन गिलानी) के साथ मिल कर बड़ी रानी के नवजात बेटे की हत्या का षडयंत्र रचती है। पर जिस सिपाही को यह काम सौंपा गया था, उसे दया आ जाती है और राजकुमार को वह लकड़ी की पेटी में रख कर वह उसे नदी में तैरा देता है।
वह पेटी माला भगत नाम के एक हरिजन के हाथ लगती है। वह और उसकी पत्नी धूड़ी (दीना पाठक) बच्चे को ‘जीवा’ (मोहन गोखले) नाम से बड़ा करते हैं। दूसरी ओर वारिस के लिए राज ज्योतिष के कहने पर राजा पानी का तालाब बनवाते हैं, पर उसमें पानी नहीं आता है। राज ज्योतिष को पता चल जाता है कि जीवा राजकुमार है। वह राजा से कहता है कि बत्तीस लक्षणा पुत्र की बलि चढ़ाने पर ही तालाब में पानी आएगा।
पूरे राज्य में ऐसा पुत्र केवल जीवा ही था। जीवा की खोज शुरू होती है। जीवा अपनी जान बचाने के लिए बनजारा जाति की अपनी प्रेमिका उजम (स्मिता पाटिल) के साथ भाग जाता है। छुपता-छुपाता वह राजा के पास समर्पण की शर्त रखता है कि ‘अगर राजा राज्य से अस्पृश्यता खत्म कर दे तो वह आत्मसमर्पण कर देगा, वरना वह आत्महत्या कर लेगा।’ राजा उसकी बात मान लेता है, परंतु बलिदान के दिन वह जेल फे भाग जाता है। जबकि अंतिम समय में राजा को पता चल जाता है कि जीवा उनका राजकुमार है, इसलिए वह बलिदान रोक देते हैं। उसी समय तालाब से पानी निकल आता है।
केतन मेहता ने प्रयोग कर के फिल्म के दो अंत रखे थे और दर्शकों पर यह छोड़ा था कि वह कौन सा अंत पसंद करते हैं। बलिदान रोक देने के साथ माला भगत कहानी पूरी कहता है, तभी दूसरा एक हरिजन वहां आकर कहता है, “भगत ‘सुखद अंत’ सुना कर लोगों को भ्रमित करता है। वह कहता है कि असल में तो जीवा की बलि चढ़ती है, फिर भी पानी नहीं आता। पुत्र की मौत सहन न कर पाने वाली माता धूणी की भी मौत हो जाती है। बेटा और पत्नी दोनों की खोने वाला माला भगत राजा को शाप देकर तालाब में आत्महत्या कर लेता है। माला की मौत होते ही तालाब में पानी आ जाता है।
यह सच है को केतन मेहता की फिल्म से धीरूबेन को गुजरात से बाहर भी ख्याति मिली, पर जिस तरह रचनात्मक जुगलबंदी में होता है, उस तरह ‘भवनी भवाई’ के निर्माण के बाद धीरूबेन को आनंद के साथ आघात भी मिला था। 2019 में बीबीसी के इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि एक लेखक के हक के लिए मुझे लड़ाई करनी पड़ी थी।
उनकी बात से तो यही लगता है कि धीरूबेन ने इस फिल्म के लिए कहानी लिखी थी, पर उसमें उन्हें क्रेडिट नहीं दी गई थी। दोनों के बीच क्या तय हुआ था, यह तो पता नहीं, पर फिल्म में लेखक और गीतकार के रूप में धीरूबेन का नाम है। जबकि स्क्रिप्ट में केतन मेहता का नाम है। नीचे की बात से यही लगता है कि यह स्क्रिप्ट किताब के रूप में भी प्रकाशित हुई होगी, उसमें धीरूबेन का नाम नहीं होगा।
‘भवनी भवाई’ पुस्तक की प्रतावना में धीरूबेन ने लिखा है कि ‘मुझे पता नहीं था कि लेखक का ‘भवनी भवाई’ होना है। 22 अक्टूबर, 1987 को सुबह मित्र सुरेश दलाल का फोन आया कि धीरूबेन स्ट्रेंड बुक स्टोर में तूम्हारी पुस्तक देखी, पर खूबी की बात यह है कि उसमें कहीं तुम्हारा नाम नहीं है। मूझे अत्यंत आश्चर्य हुआ…फिल्म- केतन मेहता, स्क्रिप्ट का पुनर्निर्माण और अनुवाद- शंपा बनर्जी। 23 नवंबर, 1987 को केतन मेहता मिलने आए। कहा कि मैं क्षमाप्रार्थी हूं। राॅयल्टी भी आप ले लो और लेखक के रूप में आप का नाम भी डलवा देता हूं। पंद्रह दिनों में कागज तो तैयार हो कर आ गया, पर राॅयल्टी और कापीराइट की बात अंदर से गुल। उस कागज का क्या मतलब? गुजराती लेखकों की आंख खोलने और कापीराइट के मामले में सजग करने के लिए यह पुस्तक प्रकाशित कर रही हूं। यह अन्य के सामने मेरा अपने ढंग का प्रतिकार है।’

About author 

वीरेन्द्र बहादुर सिंह जेड-436ए सेक्टर-12, नोएडा-201301 (उ0प्र0) मो-8368681336

वीरेन्द्र बहादुर सिंह
जेड-436ए सेक्टर-12,
नोएडा-201301 (उ0प्र0)
मो-8368681336


Related Posts

‘गोल’ माल: पेले और पालेकर |Golmal : pele aur palekar

January 15, 2023

‘गोल’ माल : पेले और पालेकर दिसंबर के अंतिम सप्ताह में, फुटबाल के खेल में दंतकथा स्वरूप ब्राजिलियन फुटबालर एडिसन

कविता-मैं तुम्हारी मीरा हूं| mai tumhari Meera hun.

January 15, 2023

कविता-मैं तुम्हारी मीरा हूं जहर का कटोरा पीने की हिम्मत हो,तभी कहना कि हे कृष्ण मैं तुम्हारी मीरा हूं।अगर प्यार

लघुकथा-जीवंत गजल | jeevant gazal

January 13, 2023

लघुकथा-जीवंत गजल हाथ में लिए गजल संध्या का आमंत्रण कार्ड पढ़ कर बगल में रखते हुए अनुज ने पत्नी से

कविता–मनुष्य | manushya par kavita

January 11, 2023

कविता–मनुष्य मनुष्य रंग बदलता मनुष्य,ढ़ंग बदलता मनुष्य। चाल बदलता मनुष्य, ढ़ाल बदलता मनुष्य। पल में फिरता मनुष्य, पल में विफरता

कविता–कृष्ण की व्यथा| krishna ki vyatha

January 9, 2023

कविता–कृष्ण की व्यथा क्या कृष्ण की कोई व्यथा नहीं थी? उनकी पीड़ा की कोई गाथा नहीं थी? छोड़ा गोकुल मैया

फिल्मी पठान : अब्दुल रहमान से बादशाह खान तक| Film Pathans: From Abdul Rehman to Badshah Khan

January 6, 2023

फिल्मी पठान : अब्दुल रहमान से बादशाह खान तक आजकल शाहरुख खान की नई फिल्म पठान चर्चा में है। शाहरुख

Leave a Comment