साँस की सुबास है।- ग़ज़ल
रात और खाब है।।
तख्त ताज आज का।
ऐश ओ विलास है।।
काम ये झकास है।।
जीत का प्रयास है।।
है तलाश लोग को।
चीज जरुर खास है।।
आधुनिक हुए भले।
दर्द ओ खटास है।।
सादगी मरी पड़ी।
चीखता संत्रास है।।
साधना कृष्ण
साँस की सुबास है।- ग़ज़ल साँस की सुबास है। रात और खाब है।। तख्त ताज आज का।ऐश ओ विलास है।। …
September 18, 2021
इश्क़ पे बदनुमा दाग है ताजमहल इश्क़ पे बदनुमा दाग है ताजमहल फक़त कब्रे मुमताज है ताज महल । होगा
September 18, 2021
नयी गज़ल से उसे नवाज़ दूँगा नयी गज़ल से उसे नवाज़ दूँगा खामोश रह कर आवाज़ दूँगा । बहुत खुश
September 18, 2021
और होंगे तेरे रूप पर मरने वाले और होंगे तेरे रूप पर मरने वाले हम नही है कुछ भी करने
September 18, 2021
साया-ए-मजबुरी में जो पले थे साया-ए-मजबुरी में जो पले थे लोग वही बेहद अच्छे भले थे । आपने जश्न मनाया
September 18, 2021
‘वो’ जिनके नाम से शायरीयाँ सुनाते हो ‘वो’ जिनके नाम से शायरीयाँ सुनाते हो क्या सचमुच तुम इतना प्यार जताते
September 18, 2021
अतीत से निकल वर्तमान में आ अतीत से निकल वर्तमान में आ फ़िर ज़िंदगी के जंगे मैदान में आ। कब