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सपने में बुलबुल , और आसन्न समस्याएँ

 व्यंग्य सपने में बुलबुल , और आसन्न समस्याएँ जुगाडू जी आज फिर , मुझसे चौक पर आ टकराये l चाय …


 व्यंग्य

सपने में बुलबुल , और आसन्न समस्याएँ

जुगाडू जी आज फिर , मुझसे चौक पर आ टकराये l चाय की टपरी पर दबोच लिया l मैनें कहा यार थोड़ी जल्दी में हूँ l इत्मीनान से शाम को चौक पर मिलते हैं l फिर , साथ में दोनों आदमी चाय पियेंगें l लेकिन , जुगाडू जी अड़ गये l नहीं तुमको चाय पीकर ही जाना होगा l मरता क्या ना करता l बैठ गया चाय पीने l चाय सुड़कते हुए जुगाडू जी बोले l बहुत दिनों से तुमसे एक बात पूछना चाह रहा था l लेकिन संकोचवश पूछ नहीं पा रहा था l मैनें कहा l बताईये क्या बात है ? 

जुगाडू जी के माथे पर चिंता की लकीरें ऊभर आईं l फिर , बोले l इधर कुछ दिनों से एक सपना मैं रोज देख रहा हूँ l

 क्या देखते हैं , सपने में मैनें पूछा ?  

सपने में मैं बुलबुल देखता हूँ l अलग – अलग रंँगों के बुलबुल l लाल , पीले , नीले , हरे और भी कई तरह के बुलबुल l 

इतने तरह के बुलबुल मैनें सपने में पहले कभी नहीं देखा था l देखता क्या हूँ , कि अब हवाई जहाज दुनिया में कहीं नहीं चल रहा है l विमान कंपनियों ने नाना प्रकार के बुलबुलों की फोटो अपनी साइट पर लगा रखी है l सड़क पर , घरों के बाहर , दूकानों के सामने , हर जगह बुलबुल ही बुलबुल दिखाई पड़ रहें हैं l कहीं दूर देश जाना हो तो बड़े आकार का बुलबुल जो विमान कंपनियों ने अपने यहाँ रखा है l उसका इस्तेमाल आप कर सकते हैं l 

कहीं थोड़ी दूरी तय करनी है l तो छोटे – छोटे बुलबुल से लोग यात्राएँ कर रहें हैं l बुलबुल पलक झपकते ही आपको एक जगह से दूसरे जगह पहुँचा दे रहें हैं l पेट्रोल पंप और डीजल की दूकानें वीरान हो चुकीं हैं l 

बुलबुल फर्टिलिटी दर कैसे बढ़ाई जाये ? इस पर अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार हो रहे हैं l किसानों को अब जूट, कपास , उगाने की सलाह देने की जगह ” बुलबुल फर्टिलिटी ” कैसे बढ़ाई जाये इसका प्रशिक्षण दिया जा रहा है l केंद्र सरकार ” बुलबुल फर्टिलिटी ” केंद्रों को खोलने पर सब्सिडी दे रही है l दोपहिया – चार-पहिया वाहन अब बँद हो चुके हैं l ग्रीन हाऊस उत्सर्जन को लेकर होने वाली सालाना बैठकें हमेशा के लिये स्थगित कर दी गईं हैं l कच्चा तेल अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कुत्ता भी नहीं पूछ रहा है l विपक्ष तेल के मँहगाई पर चर्चा की बजाय बुलबुलों की फर्टिलिटी रेट कम है l इस पर सदन में हँगामा कर रही है l विश्व की तमाम नदियाँ साफ हो गईं हैं l प्रदूषण हमेशा के लिये खत्म हो गया है l

और , मैं जो हमेशा अपनी मोटरसाईकिल और उसके तेल के खर्चे को लेकर चिंतित रहता था l मेरी चिंता एक बुलबुल खरीद लेने के कारण हमेशा के लिये खत्म हो गई है l घर का बजट भी पहले से बढ़िया हो गया है l 

तब मैनें जुगाडू जी से पूछा l तब समस्या क्या है ? पर्यावरण संकट खत्म हो गया है l नदियाँ साफ हो रहीं हैं l लोग पक्षी प्रेमी हो रहें हैं l ईंधन की समस्या खत्म हो गई है l और , क्या चाहिये आपको l मजे लीजिये l 

लेकिन , क्या सचमुच में ऐसा है ? या होगा ? ये तो सपना था l सचमुच में तो कार शेड बनाने के लिये आरे के जँगलों की तेजी से कटाई हो रही है l सपना क्या खाक सच होगा ? 

तभी , लंपट जी बीच में कूद गये l और झिड़कते हुए बोले l भईया जुगाडू जी ऐसा है l फेंकू जी हमेशा से ही फेंकतें आये हैं l दर असल ये जो अलग- अलग किस्म के आपको बुलबुल दिखाई दे रहें हैं l आसन्न , भविष्य में आने वाली अलग – अलग आर्थिक समस्याएँ हीं हैं l 

 ऐसा सुनकर जुगाडू जी का मुँह खुला का खुला ही रह गया l 

About author 

Mahesh kumar Keshari
परिचय – 
नाम – महेश कुमार केशरी
जन्म -6 -11 -1982 ( बलिया, उ. प्र.) 
शिक्षा – 1-विकास में श्रमिक में प्रमाण पत्र (सी. एल. डी. , इग्नू से) 
2- इतिहास में स्नातक ( इग्नू से) 
3- दर्शन शास्त्र में स्नातक ( विनोबा भावे वि. वि. से) 
अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशन – सेतु आनलाईन पत्रिका (पिटसबर्ग अमेरिका से प्रकाशित) .
राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन- वागर्थ , पाखी , कथाक्रम, कथाबिंब , विभोम – स्वर , परिंदे , गाँव के लोग , हिमप्रस्थ , किस्सा , पुरवाई, अभिदेशक, , हस्ताक्षर , मुक्तांचल , शब्दिता , संकल्य , मुद्राराक्षस उवाच , पुष्पगंधा , 
अंतिम जन , प्राची , हरिगंधा, नेपथ्य, एक नई सुबह, एक और अंतरीप , दुनिया इन दिनों , रचना उत्सव, स्पर्श , सोच – विचार, व्यंग्य – यात्रा, समय-सुरभि- अनंत, ककसार, अभिनव प्रयास, सुखनवर , समकालीन स्पंदन, साहित्य समीर दस्तक, , विश्वगाथा, स्पंदन, अनिश, साहित्य सुषमा, प्रणाम- पर्यटन , हॉटलाइन, चाणक्य वार्ता, दलित दस्तक , सुगंध, 
नवनिकष, कविकुंभ, वीणा, यथावत , हिंदुस्तानी जबान, आलोकपर्व , साहित्य सरस्वती, युद्धरत आम आदमी , सरस्वती सुमन, संगिनी,समकालीन त्रिवेणी, मधुराक्षर, प्रेरणा अंशु , तेजस, दि – अंडरलाईन,शुभ तारिक , मुस्कान एक एहसास, सुबह की धूप, आत्मदृष्टि , हाशिये की आवाज, परिवर्तन , युवा सृजन, अक्षर वार्ता , सहचर , युवा -दृष्टि , संपर्क भाषा भारती , दृष्टिपात, नव साहित्य त्रिवेणी , नवकिरण , अरण्य वाणी, अमर उजाला, पंजाब केसरी , प्रभात खबर , राँची एक्स्प्रेस , दैनिक सवेरा , लोकमत समाचार , दैनिक जनवाणी , सच बेधड़क , डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट , नेशनल एक्स्प्रेस, इंदौर समाचार , युग जागरण, शार्प- रिपोर्टर, प्रखर गूंज साहित्यनामा, कमेरी दुनिया, आश्वसत के अलावे अन्य पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित . 
 चयन – (1 )प्रतिलिपि कथा – प्रतियोगिता 2020 में टाॅप 10 में कहानी ” गिरफ्त ” का चयन  
(2 ) पच्छिम दिशा का लंबा इंतजार ( कविता संकलन )
जब जँगल नहीं बचेंगे ( कविता संकलन ), मुआवजा ( कहानी संकलन ) 
(3)संपादन – प्रभुदयाल बंजारे के कविता संकलन ” उनका जुर्म ” का संपादन..
(4)-( www.boltizindgi.com) वेबसाइट पर कविताओं का प्रकाशन
(5) शब्द संयोजन पत्रिका में कविता ” पिता के हाथ की रेखाएँ “
 का हिंदी से नेपाली भाषा में अनुवाद सुमी लोहानी जी द्वारा और ” शब्द संयोजन ” पत्रिका में प्रकाशन आसार-2021 अंक में.
(6) चयन – साझा काव्य संकलन ” इक्कीस अलबेले कवियों की कविताएँ ” में इक्कीस कविताएँ चयनित
(7) श्री सुधीर शर्मा जी द्वारा संपादित ” हम बीस ” लघुकथाओं के साझा लघुकथा संकलन में तीन लघुकथाएँ प्रकाशित 
(8) सृजनलोक प्रकाशन के द्वारा प्रकाशित और संतोष श्रेयंस द्वारा संपादित साझा कविता संकलन ” मेरे पिता” में कविता प्रकाशित 
(9) डेली मिलाप समाचार पत्र ( हैदराबाद से प्रकाशित) दीपावली प्रतियोगिता -2021 में ” आओ मिलकर दीप जलायें ” कविता पुरस्कृत
(10) शहर परिक्रमा – पत्रिका फरवरी 2022- लघुकथा प्रतियोगिता में लघुकथा – ” रावण” को प्रथम पुरस्कार
(11) कथारंग – वार्षिकी -2022-23 में कहानी ” अंतिम बार ” 
प्रकाशित
(12)व्यंग्य वार्षिकी -2022 में व्यंग्य प्रकाशित 
(13) कुछ लघुकथाओं और व्यंग्य का पंजाबी , उड़िया भाषा में अनुवाद और प्रकाशन 
(14)17-07-2022 – वर्ल्ड पंजाबी टाइम्स चैनल द्वारा लिया गया साक्षात्कार 
(15) पुरस्कार – सम्मान – नव साहित्य त्रिवेणी के द्वारा – अंर्तराष्ट्रीय हिंदी दिवस सम्मान -2021
संप्रति – स्वतंत्र लेखन एवं व्यवसाय
संपर्क- श्री बालाजी स्पोर्ट्स सेंटर, मेघदूत मार्केट फुसरो, बोकारो झारखंड -829144


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