Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

mainuddin_Kohri, vyang

सता का झुनझुना-व्यंग्य- मईनुदीन कोहरी

सता का झुनझुना ( व्यंग्य) राजनीति में पद की भूख व लालसा नहीं हो तो , राजनीति में फिर लोग …


सता का झुनझुना ( व्यंग्य)

सता का झुनझुना-व्यंग्य- मईनुदीन कोहरी

राजनीति में पद की भूख व लालसा नहीं हो तो , राजनीति में फिर लोग क्यों आएंगे ? आज कल राजनीति में आने के लिए कब्जे धारी , दो नंबर के व्यापारी , गुंडे बदमाश लैंडलॉर्ड ,अनैतिक काम में लिप्त लोग व अन्य कैटेगरी के लोग अपने सुरक्षा कवच के लिए राजनीति में प्रवेश कर नेताओं के कमाऊ बन जाते हैं फिर धीरे धीरे पद लालसा बढ़ती है। जुगाड़ बनाना ,चापलूसी व छोटे मोटे कार्यक्रमों का खर्च वहन करने की जोखिम के सहारे नेताओं की आवभगत कर ब्लाक ,जिले व राज्य स्तर के संगठन में विभिन्न पदों पर जगह बनने के बाद नेताओं के साथ के फोटो आदि से बायोडेटा तैयार कर जयपुर दिल्ली के रास्ते जान कर गोटियां बिठाते है फिर सता का झुनझना बजता है ,झुनझुने की आवाज होते ही सता में बैठे लोग जब चुनाव में डेढ़ दो साल बचते हैं तब सोचते हैं चुनावी चोसर में कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोलते है ,सरकार तबादलों में छूट देकर कार्यकर्ता व नेताओं की झुग्गियों के आगे अजीब नजारे अभिष्नशा से ले जोइनिग तक पेट भराई सता के झुन्नझुने के सहारे से होने के समाचार दबी आवाज में सभी विभागों में सुनने में आते हैं इस झुनझुने से सता के लोगों को पता चलता है कि चुनावी जमीन की जाजम तैयार हो रही है । फिर सता के विभिन्न बोर्डों / आयोगों के गठन का झुनझुना बजता है ,अब इस झुनझुने की आवाज से पार्टी के आकाओं की परख में उन चेहरों के ( वोट नोट सोट व जनता के बीच छबी के ) पिटारे खुलते हैं । यह झुनझुना( सता का झुनझुना) पाने की जुगाड़ में जाति / धर्म / 36 कोम के तराजू से तोल मोल के गलियारों के पापड़ बेलने पर सता का झुनझुना देकर चुनाव की जमीन में खाद पानी देने की कवायद शुरू होती है यह सता की भागीदारी का झुनझुना कई चरणों में बजता है , इसके लिए जातियों की बैशाखियां के सहारे कई झरे – कुड़छै अपनी किस्मत आजमाते हैं । कुछ आश्वासनों के झुनझुने से खुश तो कुछ संगठन के पदों के झनझुने पाकर खुश हो जाते हैं। ये सब अख़बारों में अपने गीत विज्ञापन से जनता में सता व संगठन के ढोल पीटने लगते हैं । इतने में आचार संहिता लागू हो जाती है सता का सुख भोगने से पहले ही चुनावी माहौल पार्टी को जिताने के झुनझुने को बजाते घूमो। अब सता में आने के लिए पार्टी के आकाओं से टिकट रूपी झुनझुना प्राप्त करने की बड़ी रेस के बड़े झुनझुने को पाने की दौड़ के घोड़े दौड़ते हैं । ये तो आप सब जानते हैं यह झुनझुना बहुत बड़े मोल तोल का होता है , ये झुनझुना पाकर छोटे मोटे पुराने झुनझुने , वोटों के सौदागरों के झुंझलाए चेहरों को रोंनक प्रदान करने व फिर कई प्रलोभनों के झुनझुने गांव /गली /शहर के कोन कोने में कार्यकर्ता रूपी लोगों के हाथों में थमाए जाता है ।ये सता का झुनझुना सता व विपक्ष दोनों के हाथ में बजता है ,जिसका झुनझुना जनता की समझ में आ जाए वह झुनझुना सता के गलियारों तक पहुंचने से पहले ही बाड़े बन्दी में झुनझुना जोड़तोड़ से सरकार बनने तक अनमोल ही रहता है । सता का नशा विष घोलने व कल्याण कारी कामों के झुनझुने भी सुविधानुसार इस्तेमाल करते हैं। हर स्तर पर झुनझुना बजता है चाहे सामाजिक ,धार्मिक व अन्य संस्थाओं में भी सता के लिए झुनझुना बजाना पड़ता है ।वाह री सता ,वाह रे झुनझुना ।

मईनुदीन कोहरी मो हल्ला कोहरियान् बीकानेर 334001
मो 9680868028


Related Posts

सपने में बुलबुल , और आसन्न समस्याएँ

October 1, 2022

 व्यंग्य सपने में बुलबुल , और आसन्न समस्याएँ जुगाडू जी आज फिर , मुझसे चौक पर आ टकराये l चाय

यही तो राजनीति है

September 28, 2022

 व्यंग्य यही तो राजनीति है    भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों की बात सुनने भर से ही मेरा मन एकदम से खिन्न

जी. एस . टी . में राष्ट्रवाद का तड़का

September 28, 2022

 व्यंग्य जी. एस . टी . में राष्ट्रवाद का तड़का जुगाडू जी , बी. पी. एल . परिवार से हैं

तर्पित करते मुर्दे

September 28, 2022

 व्यंग्य तर्पित करते मुर्दे हमारे राजनैतिक गिद्ध और बाबू अफसरान लोग मुर्दों का बखूबी उपयोग जानते हैं l मुर्दों का

सारनाथ के शेर

September 28, 2022

 व्यंग्य सारनाथ के शेर  अशोक स्तंभ पर के बने शेर और संसद भवन पर के बने शेरों में अंतर है

संगठित लपड़ झंडूस

September 28, 2022

 व्यंग्य संगठित लपड़ झंडूस घर में जो हाल पतियों का होता है l वही हाल आजकल हमारे यहाँ के छग्गू

PreviousNext

Leave a Comment